कांकिनाड़ा की जूट मिलों में अब तक नहीं बजा सायरन

निधि गुप्ता,कांकिनाड़ा : जहां टीटागढ़ अंचल की सभी 3 बड़ी जूट मिलों में काम की शुरूआत हो चुकी है वहीं मिल की सायरनों से गूँजने वाला कांकिनाड़ा और भाटपाड़ा इलाके अभी भी सन्नाटे में हैं। यहां की रिलाएन्स, एलाएंस, आकलैंड, नफरचंद, मेघना सहित कई बड़ी जूट मिलों का ताला नहीं खुल पाया है। आरोप है कि सरकार की सारी गाइड लाइन को मानकर मिल प्रबंधनों की ओर से भी मिलों को खोलने का दरख्वास्त दिया गया पर अभी तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल पाया है जिससे यहां के मजदूरों में भारी निराशा देखी जा रही है। आरोप है की कुछ जूट मिलों की ओर से एडवांस व अन्य तरीकों से मदद पंहुचाई गई है मगर मिलों के नहीं खुलने तक ये पैसे भी मजदूरों के लिए पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं।
क्या-क्या है समस्याएं
एक जूट मिल के मालिक ने नाम नहीं लिखे जाने की शर्त पर कहा कि सीमित लोगों को लेकर मिल खोलने में भी हमें कोई लाभ नहीं है। सरकार की ओर से जितनी संख्या में मजदूरों को लेकर काम शुरू किये जाने की बात कही जा रही है उससे काम नहीं हो पायेगा। हालांकि हमने मैन पॉवर को कुछ और बढ़ाने की मांग रखी है जिसपर विचार चल रहा है। जानकारों की मानें तो यहां पॉलिटिकल कारणों को भी मिलों के नहीं खोले जाने के पीछे की एक समस्या मानी जा रही है। आरोप है कि यहां सरकारी शर्तों पर नहीं बल्कि अपनी शर्तों पर काम शुरू किए जाने की भी लड़ाई इसके पीछे का एक कारण है।
क्या कहना है अंचल के नेताओं का
भाटपाड़ा तृणमूल कमेटी के चेयरमैन धर्मपाल गुप्ता ने बताया कि तमाम कोशिशों के बाद भी विकास को रोका नहीं जा सकता। राज्य की मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से मिलों को खोलने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था के साथ शुरुआत करवायी है। अगर इसपर भी कुछ मिले कह रही हैं कि काम नहीं हो पायेगा, उनके सामने कई उदाहरण आ चुके हैं जहां सीमित मैन पावर के साथ ही काम शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि अंचल की जूट मिलों को खुलवाने के लिए हम पूरा प्रयास कर रहे हैं। मिल मालिकों के साथ बातचीत की जा रही है जल्द ही एक-एक करके यहां भी जूट मिलें खुलने लगेंगी। वहीं भाजपा नेता फाल्गुनी पात्रा ने कहा कि जूट मिलों को खोलने के लिए जरूरी है कि दोनों पक्षों को कोई नुकसान ना हो मगर राज्य सरकार के गाइड लाइन पर चलकर मिलों को नुकसान ही उठाना पड़ सकता है अतः मिल खोलने के लिए जरूरी है कि मिल मालिकों और मजदूरों की भी परिस्थितियों को समझते हुए उन्हें आवश्यक छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे मजदूरों में भी असन्तोष नहीं होगा।
वेवर्ली जूट मिल के मजदूर निराश
जहां बैरकपुर शिल्पांचल की ज्यादातर जूट मिलों को लॉकडाउन में भी खोलकर वहां काम की शुरूआत की गई है वहीं श्यामनगर की वेवर्ली जूट मिल को खोलने की दिशा में कोई प्रयास होता नजर नहीं आ रहा इससे मजदूरों में भारी निराशा है। यहां की एंग्लो इंडिया और जेजेआई जूट मिल में भी काम शुरू हुआ है और इसे देखकर मजदूरों में भारी असन्तोष है। मिल के श्रमिक यूनियन नेताओं का कहना है कि अगर इस बीच ही मिल को खोलने की दिशा में कुछ नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

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