कटमनी मुद्दे पर विधानसभा से लेकर दिल्ली तक बवाल

कोलकाता : आम जनता तक सीधे सरकारी परिसेवा पहुंचाने के लिये मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा शुरू की गयी परियोजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार का मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने कटमनी की जांच के लिये मॉनिटरिंग सेल का गठन भी किया है, बावजूद इसके यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को राज्य विधानसभा सत्र का पहला दिन था जहां सुबह से ही कटमनी को लेकर विपक्ष ने सत्ता विरोधी नारे लगाए तो ​उधर दिल्ली में भी भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने कटमनी मुद्दे को लेकर राज्य सरकार को घेरे में लिया। कुल मिलाकर राज्य सरकार कटमनी मुद्दे पर बुरी तरह फंसी है। विपक्ष की मांग है कि जल्द से जल्द लोगों द्वारा ली गयी कटमनी की राशि उन्हें वापस दी जाए। विधानसभा के भीतर माकपा, कांग्रेस और भाजपा तीनों पार्टियों ने कटमनी को लेकर स्पीकर के सामने सरकार विरोधी नारे लगाये तथा सरकारी पक्ष से इस मुद्दे पर चर्चा करने की मांग की। सदन में विरोधी दल के नेता कांग्रेस विधायक अब्दुल मन्नान ने कहा कि सीएम ने मॉनटिरिंग सेल तो चालू कर दिया, अब इन मामलों के निदान के लिए जांच कमेटी बैठायी जानी चाहिए। इसके साथ खुद मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर चर्चा करने की पहल करनी होगी। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर बिमान बनर्जी उनकी मांगों को तवज्जो नहीं दे रहे थे ​जिसके बाद उन लोगों ने वॉकआउट ​किया। हालांकि वॉकआउट में भाजपा का साथ कांग्रेस व माकपा को नहीं मिला। कांग्रेस और माकपा के विधायकों ने सीएम विरोधी नारे भी लगाए। इधर इस मामले में चर्चा करते हुए फाब विधायक अली इमरान रम्ज ने तृणमूल सरकार को घेरते हुए कहा कि सबुज साथी के लिए साइकिल खरीदनी हो या गीतांजलि प्रकल्प के तहत गरीबों का घर बनाना हो, इन सभी में बिचौलियों को लाकर कटमनी लेने का आरोप लगाया। इतना ही नहीं विज्ञापन और पंडालों के कॉक्ट्रेक्ट के लिए भी रम्ज ने आरोप लगाया है कि कटमनी लेकर किसी अमुक संस्था को दायित्व दिया गया है। ऐसा करने वाले तृणमूल के छोटे-मोटे नेता नहीं बल्कि इसकी कड़ी ऊपर तक गयी है। इन सभी को पर्दे के पीछे से बाहर लाकर जनता का रुपया वापस लौटाना होगा।

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