उत्तर से दक्षिण कोलकाता में ऑफिस आवर्स में भारी ट्रैफिक जाम ने बढ़ायी मुश्किलें

कोलकाता : लॉकडाउन, अनलॉक-1, कंटेनमेंट जोन और पता नहीं क्या-क्या। एक महीने सड़कें बिल्कुल खाली थीं, फिर हल्का ट्रैफिक लोड और अब सड़कों पर दिखने लगा है पुराना कोलकाता जहां वाहन चलते नहीं बल्कि सरकते अथवा रेंगते नजर आ रहे हैं। खासकर ऑफिस आवर्स में समस्याएं बढ़ जा रही हैं। एक तरफ बसों की कमी ने ऑफिस आने-जाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं ताे वहीं दूसरी तरफ, ऑफिस आवर्स में भारी ट्रैफिक जाम के कारण लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर हो या दक्षिण, पूर्व हो या पश्चिम, हर ओर से समस्याएं हो रही हैं क्योंकि टाला ब्रिज के कारण लोगों को बेलगछिया के रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस कारण बेलगछिया से ही भारी ट्रैफिक जाम लग जा रहा है और आरजी कर ब्रिज से गाड़ियां एक तरह से रेंगती हुई जा रही हैं।
सभी बसें उतरने पर क्या होगा
सड़कों पर सभी बसें उतरने से क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है क्योंकि अभी कम बसें होने के बावजूद सड़कों पर वाहनों की भरमार दिख रही है। बस संगठन के प्रदीप नारायण बोस ने बताया ​कि महानगर में फिलहाल 20 प्रतिशत बसें ही चल रही हैं। आज यानी मंगलवार से बसें 5 प्रतिशत और कम हो सकती हैं क्योंकि डीजल के दाम लगातार बढ़ने के कारण अब बस मालिकों के लिए बसें चलाना काफी मुश्किल हो गया है।
बसें कम, फिर भी ट्रैफिक जाम क्यों
सड़कों पर बसों की संख्या कम होने के बावजूद ट्रैफिक जाम लग जा रहा है। इसका कारण है कि निजी वाहनों की संख्या बढ़ गयी है। लॉकडाउन से पहले तक जो लोग कभी-कभी ही अपने वाहन सड़कों पर निकालते थे, वे भी अब रोजाना वाहन निकाल रहे हैं। इसके अलावा कई ऐसे लोग भी हैं जो पहले बसों अथवा ऑटो से ऑफिस आते-जाते थे मगर अब उन्होंने बाइक या साइकिल खरीद ली है। इस कारण बसों की संख्या तो कम है, लेकिन सड़कों पर ट्रैफिक काफी बढ़ गया है। सड़कों पर बाइक, साइकिल सहित छोटे वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी होने से बसों की स्पीड में भी कमी आ गयी है जिस कारण ट्रैफिक की गति धीमी होने से जाम लग जाता है।
सुबह 8 से 12 बजे तक यात्री होते हैं काफी परेशान
सुबह 8 से 12 बजे तक ऑफिस आवर्स में यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बसों की समस्याओं के साथ ट्रैफिक जाम ने ऑफिस यात्रियों की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है। कुछ ऐसी ही परिस्थिति शाम के समय भी होती है। लोगों को अपने घरों तक पहुंचने में भी घंटों का समय लग जा रहा है।

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