आये दिन अस्पतालों में होने वाली हिंसक घटनाओं का जिम्मेवार कौन?

कोलकाता : सरकारी अस्पताल हो या फिर गैर – सरकारी, डॉक्टरों की पहली कोशिश होती है मरीज को बचाने की। भरपूर कोशिशों के बावजूद अगर कोई मरीज बच न पाये तो फिर इसमें दोष भला किसका होता है ? मरीज के परिजनों की ओर से आरोप लगाये जाते हैं कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण मौत हुई है। वहीं डॉक्टरों का कहना होता है कि मरीज को गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया जाता है जिस कारण उन्हें बचा पाना अत्यंत मुश्किल हो जाता है। डॉक्टरों और मरीज के परिजनों के बीच कहासुनी होने लगती है और आये दिन ऐसी कहासुनी अस्पतालों में हिंसक घटनाओं का रूप धारण कर लेती है। निजी अस्पतालों की बात करें तो निजी अस्पतालों में मरीज को भर्ती करवाने के साथ ही उनसे रुपये लाने को कहा जाता है। रुपये लाने में जैसे – जैसे देरी होती है, उतनी ही तेजी से स्थितियां हाथ से निकलने लगती हैं। अस्पताल प्रबंधन और मरीज के परिजन दोनों की अलग – अलग बात और अलग – अलग राय होती है। बुधवार को सीएमआरआई में हुई घटना भी आये दिन अस्पतालों में होने वाली हिंसक घटनाओं का एक उदाहरण है।

गत 1 वर्ष में राज्य के मुख्य अस्पतालों में हुई हिंसक घटनाओं पर एक नजर –   
एसएसकेएम अस्पताल, वर्ष -2016
– 4 मार्च – मरीज की मौत के बाद हंगामा व अस्पताल में तोड़फोड़।
– 28 अप्रैल – बिल्ली के हमले से मरीज के घायल होने के बाद अस्पताल में हंगामा।
– 23 जून – एक बच्चे के इलाज में देरी के बाद मरीज के परिजनों व जूनियर डॉक्टरों में हाथापाई। जूनियर डॉक्टरों ने घण्टों काम बंद किया था।
– 3 जुलाई – 2 महीने के नवजात की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा
– 30 अगस्त – अज्ञात बुखार के कारण भर्ती मरीज की मौत के बाद हंगामा व तोड़फोड़। 5 घण्टे तक डीएमई व डायरेक्टर का घेराव।
– 31 अगस्त – शंकर साव (48) की मौत के बाद परिजनों ने 2 नर्सों की पिटायी कर दी थी।
–  6 सितम्बर – मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में भारी तोड़फोड़ की थी।
आरजीकर अस्पताल, वर्ष -2016
–  20 जनवरी – अस्पताल द्वारा डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में बच्ची को बच्चा लिख दिया गया था जिसके बाद परिजनों द्वारा अस्पताल में हंगामा मचाया गया था।
– 3 अक्टूबर – मरीज की मौत के बाद अस्पताल रणक्षेत्र में तब्दील हुआ था।
–  30 अक्टूबर – प्रसूता रेशमा बीबी (22) की मौत के बाद परिजनों व आया के बीच मारपीट हुई थी।
– 17 नवम्बर – दवा दुकान से दवा नहीं मिल पाने के कारण मरीज की मौत हो गयी थी। परिजनों ने अस्पताल में हंगामा मचाया था।
कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, वर्ष – 2016
– 7 जून – बदमाशों द्वारा अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में भारी तोड़फोड़। मो. इदरीश (60) की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था।
– 17 सितम्बर – रांची के रहने वाले मेडिकल के छात्र रितेश जायसवाल की बाइक से सड़क दुर्घटना हुई थी। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उसकी मौत हो गयी थी जिस कारण उसके सहपाठी मेडिकल छात्रों ने अस्पताल में हंगामा मचाया था। उक्त घटनाएं केवल शहरों के अस्पतालों की हैं। जिलों के अस्पतालों में भी आये दिन हिंसक घटनाएं होती रहती हैं। एसएसकेएम अस्पताल में हाल में हुई कई घटनाओं के बाद अस्पताल की सुरक्षा में इजाफा किया गया था। इसके अलावा रोगी कल्याण समिति में भी बदलाव किया गया था। सरकार की तमाम काेशिश रहती है कि अस्पतालों में हिंसक घटनाएं नहीं हों पर बीच-बीच में ऐसा कुछ हो जाता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर अंगुली उठ जाती है।

कुछ देर के लिए अस्पताल में मच गया था कोहराम

बुधवार की सुबह सीएमआरआई अस्पताल में तोड़फोड़ की घटना के दौरान कुछ देर के लिए वहां अफरा -तफरी का मौहल छा गया। उग्र भीड़ ने जैसे ही अस्पताल के कांच के गेट को तोड़ा वैसे ही वहां अंदर बैठे मरीज व उनके परिजन सहम गए। इस दौरान वे लोग कुछ समझ पाते तब तक करीब 70 से 80 युवकों का एक दल अस्पताल के अंदर घुस आया और वे एडमिशन ऑफिस में तोड़फोड़ करने लगे। उन्होंने मरीज के परिजनों के लिए रिसेप्शन एरिया में लगे टीवी सहित अन्य सामानों को तोड़ दिया। उग्र युवकों को रोकने के लिए आगे आए अस्पताल के कर्मचारियों के साथ भी मारपीट की गयी। खासतौर पर अस्पताल के नाइट शिफ्ट मैनेजर को बेरहमी से पीटा गया।
आंखों के सामने अस्पताल में तांडव होते देख रिसेप्शन व एडमिशन डेस्क के सामने बैठे लोगों में भगदड़ मच गयी। सभी लोग वहां से उठकर भागने लगे। उग्र भीड़ के आतंक से अस्पताल के कर्मचारी भी अपनी जान-बचाकर भाग निकले। सुबह के वक्त अस्पताल के आउटडोर में कुछ डॉक्टरों को दिखाने के लिए मरीज आए हुए थे। उग्र भीड़ के तांडव के कारण सेवा भी थोड़ी देर के लिए प्रभावित हुई लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने थोड़ी देर के बाद मरीजों के लिए सेवा शुरू कर दी।
पुलिस पर लगा निष्क्रियता का आरोप : अस्पताल में अपनी पत्नी को दिखाने आए तपन विश्वास ने कहा कि जिस वक्त अस्पताल में तोड़फोड़ की जा रही थी उस वक्त कुछ पुलिस कर्मी भी अस्पताल के बाहर थे लेकिन उन्होंने मनचलों को रोकने की कोशिश नहीं की। पुलिस की मौजदूगी में हो रही तोड़फोड़ के कारण सभी लोग डर गये थे और इस लिए एडमिशन व रिसेप्शन डेस्क की तरफ से बाहर भाग आये। इस मामले को लेकर एडिशनल सीपी 3 संयुक्त पुलिस आयुक्त (हेडक्वार्टर्स ) सुप्रतिम सरकार ने बताया कि अस्पताल के सीईओ डॉ. शांतनू चट्टोपाध्याय की शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 147/148/149/323/324/506 सहित अन्य एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। उन्होंने  कहा कि अस्पताल में हुई तोड़फोड़ के मामले में स्थानीय पुलिस स्टेशन की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच में अगर कोई पुलिस कर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अस्पतालों में हो रहे हमलों पर सीएम कर सकती हैं बैठक

राज्य के विभिन्न हिस्सों में अस्पतालों में हो रहे हमलों को लेकर राज्य सरकार उद्विग्न है। इस विषय पर सीएम ममता बनर्जी बैठक कर सकती हैं। नवान्न सूत्रों के मुताबिक निजी अस्पतालों के प्रबंधन के साथ जल्द एक मीटिंग की जाएगी। हमले के कारण आम जनता व अन्य मरीजों को होने वाले नुकसान के लिए क्या किया जा सकता है, कैसे हल निकाला जा सकता है, इस पर चर्चा की जाएगी। वहीं मरीजों के परिजनों को भी किसी प्रकार की समस्या न हो इस पर भी सीएम विशेष ध्यान देंगी। सीएम ने पहले भी कहा है कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं अस्पतालों में तोड़फोड़ की घटनाओं से भी वह उद्विग्न हैं। अस्पताल प्रबंधन तथा मरीज पक्ष में आपसी सामंजस्य किसी चुनौती से कम नहीं है।

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