इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिया योगी सरकार को झटका

YOGI

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश सरकार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से झटका लगा है। प्रदेश सरकार द्वारा अन्य पिछड़े वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने के फैसले पर न्यायालय ने रोक लगा दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य के समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह को व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया हैं।

जाति में बदलाव का अधिकार संसद को

प्रदेश सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजीव मिश्र की डिविजन बेंच ने कहा कि योगी सरकार का फैसला पूरी तरह से गलत है। राज्य सरकार ऐसे मामलों में फैसला नहीं ले सकती है क्योंकि एससी-एसटी जातियों में बदलाव का अधिकार सिर्फ देश की संसद को ही है। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से 24 जून को जो आदेश जारी किया गया है, वह पूरी तरह से गलत है।

पिछड़े वर्ग को अनुसूचित जाति में किया शामिल

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 जून को पिछड़े वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया था। उन्होंने कहा था कि ये जातियां सामाजिक और आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़ी हुई हैं इसलिए इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है। गौरतलब है कि सरकार ने इन सभी जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र देने का निर्देश जिला अधिकारियों को दे दिया था। बता दें कि योगी सरकार ने निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा, गोंड़ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया था।

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