लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी मायावती

उनके खुद चुनाव जीतने की बजाय गठबंधन की जीत जरूरी
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है। बुधवार को उन्होंने कहा कि वे गठबंधन को जिताना चाहती हैं और उनके खुद चुनाव जीतने की बजाय गठबंधन की जीत जरूरी है। उनका गठबंधन बेहतर स्थिति में है। वे जब चाहें, लोकसभा का चुनाव जीत सकती हैं। वे फिलहाल लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगी।
उन्होंने कहा कि अगर चुनाव बाद मौका आयेगा तो मैं जिस सीट से चाहूंगी, उस सीट को खाली कराकर लोकसभा की सांसद बन सकती हूं। इसलिए देश के वर्तमान हालात को देखते हुए तथा अपनी पार्टी के मूवमेंट के व्यापक हित के साथ जनहित व देश हित का भी यही तकाजा है कि मैं लोकसभा का चुनाव अभी न लड़ूं। उन्होंने उत्तर प्रदेश से चार बार लोकसभा चुनाव जीता है तथा दो बार विधानसभा की सदस्य भी रही हैं। वे चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रही हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें प्रदेश की किसी भी सीट पर केवल अपना नामांकन भरने के लिए ही जाना होगा और बाकी जीत की जिम्मेदारी उनके लोग खुद ही उठा लेंगे, यह निश्चित है। अगर वे चुनाव लड़ेंगी तो पार्टी के लोग उनके लाख मना करने के बावजूद उनके लोकसभा क्षेत्र में काम करने जायेंगे, जिससे दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव के प्रभावित होने की आशंका है। वह ‘पार्टी मूवमेंट’ के हित में ऐसा कतई नहीं चाहती हैं। इस देश में गरीब, मजदूर, किसान, बेरोजगार, व अन्य मेहनतकश विरोधी भाजपा की वर्तमान अहंकारी, निरंकुश, जातिवादी, व सांप्रदायिक सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए ही उप्र में बसपा, सपा व रालोद का गठबंधन किया गया है। हर कोई इस गठबंधन की तीनों पार्टियों की हर सीट जीतने के लिए जी जान से लगा है जिसे मैं कोई नुकसान होते नहीं देखना चाहती। मायावती ने लोकसभा चुनाव न लड़ने के बारे में अपने बयान पर ट्वीट के जरिये स्पष्टीकरण दिया है कि जिस प्रकार 1995 में जब मैं पहली बार यूपी की सीएम बनी थी तब मैं यूपी के किसी भी सदन की सदस्य नहीं थी। ठीक उसी प्रकार केन्द्र में भी पीएम/मंत्री को छह माह के भीतर लोकसभा/राज्यसभा का सदस्य बनना होता है। इसीलिए अभी मेरे चुनाव नहीं लड़ने के फैसले से लोगों को कतई मायूस नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से गठबंधन के तहत बसपा 38, सपा 37 और रालोद तीन सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। वहीं, दो सीटों अमेठी और रायबरेली को कांग्रेस के लिए छोड़ा गया है।

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