भाई की मौत ने ​सिखाया पद्मश्री बिपिन को आग से खेलना

कोलकाता : कद लम्बा, दिखने में दुबला – पतला लेकिन काम आग से पंजा लड़ाकर लोगों की जिंदगी बचाना। 60 वर्षीय बिपिन गनात्रा यह काम आज से नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से करते आ रहे हैं।

कौन हैं बिपिन गनात्रा

बिपिन गनात्रा कहीं भी आग लगने की खबर पाकर मौके पर पहुंच लोगों की जान बचाते हैं। यह कार्य वह नि:स्वार्थ करते हैं। वह हर समय टीवी पर नजर बनाये रखते हैं ताकि कहीं आग लगने की कोई घटना उनसे छूट न जाए। इस बार उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
देवेंद्र मल्लिक रोड के रहने वाले बिपिन गनात्रा को सामाजिक कार्यों के लिए पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। गनात्रा मुख्य रूप से गुजरात के जूनागढ़ के हैं, लेकिन उनका जन्म कोलकाता में 15 दिसम्बर 1956 में हुआ था। उनके मां – बाप की मौत हो चुकी है और घर में वह अकेले ही रहते हैं। वर्ष 1994 में बाईपास सर्जरी और आर्थिक तंगी के कारण बिपिन ने विवाह नहीं किया। देवेंद्र मल्लिक रोड में एक छोटे से घर में रहते हैं गनात्रा। घर में सामान के नाम पर 2 आलमारियां, 1 टीवी और आज तक उन्होंने जितने अवार्ड प्राप्त किये हैं, वह सब मौजूद हैं।
12 वर्ष की उम्र में आग लगने की एक घटना में अपने भाई नरेंद्र को खोने के बाद से बिपिन की जिंदगी पूरी तरह बदल गयी। आग से लोगों को बचाना ही उनके जीवन का मकसद हो गया है। शुरुआत में तो बिपिन दमकल कर्मियों की हल्की मदद करते थे, लेकिन धीरे – धीरे उन्हें दमकल कर्मी व पुलिस के बड़े – बड़े अधिकारी भी पहचानने लगे। जीवन – यापन के लिए बिपिन घरों में इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं। बाकी दोस्तों की मदद और चैरिटी से उनका घर चलता है।
बहूबाजार बम ब्लास्ट की घटना में पहली बार बचायी लोगों की जान
24 मार्च 1993कोबहूबाजार में बम ब्लास्ट की घटना में लगभग 15 लोग मारे गये थे। यह पहली घटना थी जब मैंने लगातार 3 दिन घटनास्थल पर रहकर लोगों की जान बचायी थी। अब तक आग लगने की 100 घटनाओं में वह लोगों की जान बचा चुके हैं।
बिपिन के आते ही पुलिस भी हो जाती है निश्चिंत
जैसे ही किसी आग लगने की घटना में बिपिन पहुंच जाते हैं तो वहां मौजूद पुलिस व दमकल कर्मी भी निश्चिंत हो जाते हैं कि अब किसी की जान को कोई खतरा नहीं होगा। आग से लोगों की जान बचाने के साथ – साथ बिपिन एमजी रोड पर ट्रैफिक भी संभालते हैं।
नहीं भूल पाऊंगा स्टीफन हाउस व कैनिंग स्ट्रीट में अागलगी की घटना
बिपिन कहते हैं, ‘स्टीफन हाउस व 59 कैनिंग स्ट्रीट में आग लगने की घटना कभी नहीं भूल सकता हूं। कैनिंग स्ट्रीट में आग लगने की घटना में 22 लोगों की जान गयी थी। मुझे याद है कि बिल्डिंग के चौथे तल्ले पर एक गर्भवती महिला नीचे कूदने की कोशिश कर रही थी। आग पूरी बिल्डिंग में फैल चुकी थी, लेकिन मैं किसी तरह चौथे तल्ले पर गया और एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग में रस्सी बांधकर महिला को बचाया। ऐसी घटनाएं दिल व दिमाग में अमिट छाप छोड़ जाती हैं।’
पद्मश्री मिलने के साथ जवाबदेही भी बढ़ी
गनात्रा ने कहा, ‘पद्मश्री जैसा सम्माननीय पुरस्कार पाकर भला किसे अच्छा नहीं लगता। हां यह बात जरूर है कि पद्मश्री मिलने के साथ – साथ समाज के प्रति मेरी जवाबदेही भी बढ़ गयी है। समाज के बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूरी है।’
कोई गड़बड़ी होने पर बदल जाती है बॉडी लैंग्वेज
बिपिन के अनुसार, जब भी कहीं आग लगने की घटना होती है तो उन्हें यह बात महसूस हो जाती है। उनकी बॉडी लैंग्वेज बदल जाती है। यही कारण है कि कभी – कभी दमकल के पहुंचने से पहले वह घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं।
सेवा भाव से दूर होंगी समाज की खामियां
बिपिन का मानना है कि सेवा भाव से ही समाज की खामियां दूर की जा सकती हैं। उनका उद्देश्य केवल लोगों की जान बचाना है और वह समाज को भी यह संदेश देना चाहते हैं कि लोग कुछ समय दूसरों के लिए भी निकालें।

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