बेनीवाल अब लोकसभा में राजस्थान की आवाज बनेंगे

जयपुर : राजस्थान के नागौर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन प्रत्याशी के रूप में पहली बार सांसद बने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल बड़े नये जाट नेताओं में शरीक हो गये हैं। गत वर्ष हुए राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के नाम से नयी पार्टी बनाकर तीसरी बार खींवसर से विधायक बने हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा चुनाव से पहले चुनावी रुख को भांपते हुए भाजपा के साथ गठबंधन कर पहली बार सांसद बनने में कामयाब रहे। इस लोकसभा चुनाव में हरियाणा के दिग्गज जाट नेता जाट नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा तथा उत्तर प्रदेश में कई वर्षों से राजनीतिक प्रभुत्व रखने वाले बड़े जाट नेता चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी में हार का सामना करना पड़ा। बेनीवाल ने कांग्रेस का गढ़ एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री नाथूराम मिर्धा के वर्चस्व वाली नागौर सीट से दूसरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और मिर्धा की पोती तथा पूर्व सांसद कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को एक लाख 81 हजार 260 मतों से हराया। इससे पहले 2014 में बेनीवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव हार गये, उन्हें करीब एक लाख साठ हजार मत मिले थे। गत विधानसभा चुनाव से पहले बेनीवाल ने कांग्रेस और भाजपा दोनों का विरोध करते हुए नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर में चार बड़ी रैलियां करने के बाद गत अक्टूबर के आखिर में जयपुर में महारैली कर अपनी नयी पार्टी रालोपा का गठन किया। रालोपा के कारण कई जगहों पर इन दोनों पार्टियों को नुकसान उठाना पड़ा। पिछले विधानसभा चुनाव में 58 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली रालोपा को बेनीवाल सहित तीन सीटें आयी थीं। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख पार्टियों की नजर बेनीवाल पर टिक गयी और शुरू में कांग्रेस ने उनके साथ गठबंधन का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं रही। इसके पश्चात भाजपा ने उनके साथ गठबंधन कर लिया। बेनीवाल राजस्थान विधानसभा में हमेशा जनता की समस्याओं एवं मुद्दों को लेकर प्रश्न उठाते रहे और मौका नहीं मिलने पर भी बीच में उठकर मुद्दा उठाने का हरसंभव कोशिश करने के कारण हमेशा चर्चा में रहे। बेनीवाल ने खींवसर से दो बार विधायक बनने के बाद राजस्थान में जाट मुख्यमंत्री बनाने का मिशन चलाया तथा इसके लिए जगह जगह भारी काफिले के साथ बड़ी बड़ी सभाएं कर लोगों को संकल्पबद्ध किया।

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