प्रियंका ने गंगा पूजन कर प्रयागराज से बनारस की तीन दिवसीय यात्रा का श्रीगणेश किया

गंगा की लहरों पर नाव में सवार हो पूर्वांचल की सीटें साधने का लक्ष्य

मनैया घाट (प्रयागराज) : सोमवार को कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रयागराज में लेटे हनुमान के दर्शन, विधिविधान से गंगा की आरती तथा पूजा करने के बाद क्रूज बोट से प्रयागराज से बनारस की अपनी तीन दिवसीय यात्रा यहां मनैया घाट से आरंभ की। प्रियंका का काफिला शहर से करीब 20 किमी दूर मनैया घाट पहुंचा, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों का अभिवादन किया और अपनी इस यात्रा के लिए क्रूज बोट पर सवार हो गयीं। मनैया घाट पर प्रियंका का स्वागत करने बहराईच की पूर्व सांसद सावित्री बाई फुले भी आयी थीं। उनकी तीन दिवसीय यात्रा 20 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में सम्पन्न होगी। रविवार की शाम प्रयागराज पहुंची प्रियंका ने एक ट्वीट कर स्वराज भवन से जुड़ी अपनी यादों को ताजा करते हुए कहा कि स्वराज भवन के आंगन में बैठकर मैं वह कमरा देख सकती हूं, जहां मेरी दादी इंदिरा गांधी का जन्म हुआ था। मुझे सुलाते हुए वह ‘जोन ऑफ आर्क’ की कहानी सुनाया करती थीं। उनके शब्द आज भी मेरे कानों में गूंजते हैं कि निडर बनो। सब कुछ ठीक होगा।
एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी ने रविवार को का था कि वे जलमार्ग, बस, ट्रेन और पदयात्रा सहित परिवहन के विभिन्न माध्यमों से लोगों तक पहुंचेंगी।गंगा नदी सत्य और समानता का प्रतीक है। यह हमारी गंगा जमुनी तहजीब का भी प्रतीक है। गंगा उत्तर प्रदेश की जीवन रेखा है और उनके सहयोग से मैं आप तक पहुंचूंगी। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में आम चुनाव होंगे।

उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछले 35 साल में कांग्रेस की खोयी हुई जमीन को वापस पाने के उद्देश्य से  प्रियंका ने प्रयागराज से गंगा में नाव पर सवार होकर तीन दिन का दौरा शुरू किया। प्रियंका का पूरा फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश पर केन्द्रित है। वे अपने परनाना पंडित जवाहर लाल नेहरू की संसदीय सीट फूलपुर को साधने के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में घेरने की कोशिश में हैं। इस दौरान वे चार लोकसभा सीटों फूलपुर, भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी के मतदाताओं को साधने की हर संभव कोशिश करेंगी। इलाहाबाद, फूलपुर और चायल तीनों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस 1984 के बाद जीत के लिए तरस रही है। उत्तर प्रदेश में 1988 में कांग्रेस की आखिरी सरकार के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी रहे। उसके बाद से कांग्रेस फिर सत्ता में नहीं लौट सकी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रियंका जल मार्ग से भ्रमण कर पूर्वांचल को यह संदेश देना चाहती हैं कि वह उनके बीच की हैं। प्रियंका इस चुनावी यात्रा से सॉफ्ट हिन्दुत्व के साथ गंगा से प्रेम भी भी लोगों को दिखाना चाहती हैं। राजनीति के जानकारों का यह भी मानना है कि कांग्रेस महासचिव जलमार्ग से वाराणसी तक 110 किलोमीटर का सफर करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘नमामि गंगा प्रोजेक्ट’ की हकीकत से रू-ब-रू होना चाहती हैं। वह गंगा की अविरलता और निर्मलता को चुनावी मुद्दा बना सकती हैं। इस दौरन वे कई गांवों और उपासना स्थलों में भी जायेंगी। वे इन क्षेत्रों में ग्रामीणों, कार्यकर्ताओं और बुनकरों से मुलाकात कर उनकी और क्षेत्र की समस्याओं के बारे में जानकारी लेंगी।

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