माराडोना : एक खिलाड़ी, एक जादूगर

ब्यूनस आयर्स : महज 5 फुट 5 इंच के डिएगो माराडोना जब गेंद को लेकर मैदान पर विरोधी खेमें मे घुसते थे तो खलबली मच जाती थी। गेंद को लेकर भागने की उनकी तेजी, गेंद पर उनका कंट्रोल वो सबकुछ इस तरीके से करते थे कि कोई समझ ही नहीं पाता था और माराडोना अपनी टीम के लिए गोल कर जाते हैं। उनके चाहने वाले उन्हें खिलाड़ी नहीं, बल्कि जादूगर मानते थे। लेकिन अब वो सबकुछ सिर्फ यादों में सिमट कर रह जाएंगी क्योंकि 60 साल की उम्र में वो इस दुनिया को अलविदा कह गए। इसके साथ ही उस करिश्माई सफर का अंत हो गया, जो हर फुटबॉल फैंस के जेहन में बसता है। फुटबॉल फैंस गम में डूबे हुए हैं। वह न केवल करिश्माई खिलाड़ी रहे, बल्कि शानदार कोच भी रहे। वे अपने प्रशंसकों के दिलों में हमेशा अमर रहेंगे। मैराडोना गरीब परिवार में जन्मे थे। हालांकि, जो शोहरत, पैसा और मुकाम मैराडोना ने हासिल की, उसकी कोई खिलाड़ी बस कल्पना ही कर सकता है।

गरीबी से लड़कर बने सुपरस्टार

मैराडोना का जन्म ब्यूनस आयर्स के लानुस में एक गरीब परिवार में हुआ था। ये ब्यूनस आयर्स की झुग्गी-झोपड़ी वाला इलाका था। मैराडोना के पिता डॉन डिएगो और मां साल्वाडोरा फ्रेंको को 3 बेटियों के बाद पहला बेटा मिला था, मैराडोना। ये परिवार बाद में बढ़कर 8 भाई-बहनों वाला हो गया। मैराडोना जब 3 साल के थे, तो उन्हें उनके भाई ने एक फुटबॉल गिफ्ट की थी। तभी से मैराडोना को फुटबॉल से इतना प्यार हुआ कि वो 6 महीने तक उसे अपनी शर्ट के भीतर रखकर ही सोते थे।अपनी गरीबी से लड़ते हुए वो युवावस्था आने तक फुटबॉल के सुपरस्टार बन चुके थे। कुछ लोग तो उन्हें ब्राजील के महान फुटबॉलर पेले से भी शानदार खिलाड़ी मानते हैं। माराडोना ने 491 मैचों में कुल 259 गोल दागे थे। इतना ही नहीं, एक सर्वेक्षण में उन्होंने पेले को पीछे छोड़ ’20वीं सदी के सबसे महान फुटबॉलर’ होने का गौरव अपने नाम कर लिया था।

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