निर्णायक जंग में सुंदर और ठाकुर का जलवा

दोनों ने सातवें विकेट के लिए 123 रनों की रिकार्ड साझेदारी की, ऑस्ट्रेलिया 54 रनों से आगे

ब्रिस्बेन : ब्रिसबेन के गाबा मैदान में पदार्पण टेस्ट खेल रहे आलराउंडर वाशिंगटन सुंदर (62) और दो साल के बाद अपना दूसरा टेस्ट खेल रहे शार्दुल ठाकुर (67) के बेहतरीन और साहसिक अर्धशतकों से भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे और निर्णायक टेस्ट के तीसरे दिन रविवार को पहली पारी में 336 रन बनाकर मेजबान टीम को बड़ी बढ़त लेने से रोक दिया। ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में 33 रन की बढ़त मिली। भारत ने एक समय अपने छह विकेट 186 रन पर गंवा दिए थे और तब लग रहा था कि ऑस्ट्रेलिया बड़ी बढ़त लेने में कामयाब हो जाएगा लेकिन आखिरी चार बल्लेबाजों ने 150 रन जोड़कर भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा दिया। ऑफ स्पिन आलराउंडर सुंदर ने 62 रन की पारी में सात चौके और एक छक्का लगाया जबकि तेज गेंदबाज ठाकुर ने आक्रामक तेवरों के साथ 67 रन में नौ चौके और दो छक्के लगाए। दसवें नंबर के बल्लेबाज मोहम्मद सिराज ने भी उपयोगी योगदान देते 10 गेंदों पर 13 रन में दो चौके लगाए। चोटिल तेज गेंदबाज नवदीप सैनी ने 14 गेंदों पर पांच रन में एक चौका लगाया। आखिरी बल्लेबाज टी नटराजन नौ गेंदों पर एक रन बनाकर नाबाद रहे। ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में बिना कोई विकेट गंवाए 21 रन बना लिए हैं। डेविड वॉर्नर (20 रन) और मार्कस हैरिस (1 रन) बनाकर क्रिज पर हैं।

 

कपिल देव-मनोज प्रभाकर का रिकॉर्ड तोड़ा 
शार्दुल और सुंदर ने कपिल देव और मनोज प्रभाकर के 30 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। कपिल-मनोज ने 1991 में 7वें विकेट के लिए 58 रन की साझेदारी की थी। सुंदर और शार्दुल ने रविवार को 7वें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर इस रिकॉर्ड को तोड़ा। सुंदर और ठाकुर ने सातवें विकेट के लिए 123 रन की शानदार साझेदारी कर भारत को संकट से उबारा। इसके अलावा ब्रिस्बेन में 20 साल बाद 8वें या इससे नीचे के बल्लेबाज ने अर्धशतक बनाया। शार्दुल से पहले 1991 में पाकिस्तान के मोइन खान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 61 रन की पारी खेली थी।

शतक पूरा नहीं होने से सुंदर के पिता निराश
वॉशिंगटन सुंदर ने अपने करियर का पहले ही टेस्ट मैच में अहम मुकाम पर 144 गेंदों पर 62 रनों की शानदार पारी खेली। सब ओर उनकी तारीफ हो रही है लेकिन उनके पिता-एम. सुंदर शतक पूरा नहीं होने से निराश हैं। सुंदर के पिता को लगता है कि उनके बेटे को शतक पूरा करना चाहिए था क्योंकि उसमें बल्लेबाजी की काबिलियत है। एम. सुंदर ने कहा कि ‘मैं निराश हूं कि वह शतक पूरा नहीं कर सका। जब सिराज आए थे तब उसे चौके और छक्के लगाने चाहिए थे। वह यह कर सकता था। उसे पुल करना चाहिए था और बड़े शॉट्स लगाने चाहिए थे। और कुछ नहीं तो उसे ऑस्ट्रेलिया के स्कोर की बराबरी करने की कोशिश करनी चाहिए थी।’ रोजाना उनकी बेटे से बात होती और एक दिन पहले भी हुई थी। मैंने उससे कहा था कि मौका मिले तो बड़ा स्कोर खेलना। उसने कहा था कि वह जरूर खेलेगा।’ सुंदर से पहले भारत के लिए टेस्ट मैचों में डेब्यू के साथ अर्धशतक लगाने के साथ-साथ तीन या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा अब तक सिर्फ दो खिलाड़ी कर सके थे। इनमें से एक दत्तू फडकर भी थे, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया का पहली बार दौरा करने वाली भारतीय टीम के लिए यह कारनामा किया था।

रवि शास्त्री का ‘गुरु ज्ञान’ काम आया : शार्दुल
भारतीय तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यहां चौथे टेस्ट की पहली पारी में जब बल्लेबाजी के लिए उतरे तब टीम छह विकेट पर 186 रन बनाकर संघर्ष कर रही थी ऐसे में उनके दिमाग में कोच रवि शास्त्री की वह बात थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर आप इस देश में प्रदर्शन करते है तो दर्शकों से काफी सम्मान मिलेगा। शार्दुल ने मैच के बाद कहा कि जब मैं मैदान में गया, तो स्थिति कठिन थी और मैं इससे इनकार नहीं करूंगा। दर्शक ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों की हौसला अफजाई कर रहे थे। लेकिन मुझे हमारे कोच रवि शास्त्री की एकदिवसीय सीरीज से पहले की गई बातें याद थीं।’ अगर आप इस देश में प्रदर्शन करते हैं, तो आपको (दर्शकों का) सम्मान मिलेगा। दिन के खेल के बाद यह मेरी टीम के लिए मददगार होगा, मेरे लिए यही सबसे बड़ी सकारात्मक बात है। मेरे दिमाग में दो ही चीजें थी। दर्शक शोर मचाएंगे लेकिन अगर मैं अच्छी बल्लेबाजी करूंगा तो वे मेरी तारीफ भी करेंगे।दर्शकों के साथ भारतीय ड्रेसिंग रूम ने भी आउट होने के बाद खड़े होकर उनका अभिवादन किया। शार्दुल ने कहा कि उन्हें बल्लेबाजी करना पसंद है और वह मौके का इंतजार कर रहे थे।

हम अपनी योजनाओं को नहीं कर पाए लागू : हेजलवुड
ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड ने चौथे टेस्ट के तीसरे दिन भारत को अपनी शतकीय साझेदारी से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का श्रेय वाॅशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर को दिया लेकिन कहा कि मेजबान टीम के गेंदबाज रविवार को विपक्षी टीम के पुछल्ले बल्लेबाजों को जल्दी पवेलियन भेजने की योजनाओं को ठीक से लागू नहीं कर सके। हेजलवुड ने 57 रन देकर पांच विकेट चटकाए, उन्होंने दिन का खेल समाप्त होने के बाद वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘हां, यह (शार्दुल और वाॅशिंगटन के बीच) निश्चित रूप से महत्वपूर्ण साझेदारी है लेकिन फिर हमने उनके विकेट झटक लिए। मुझे लगता है कि जब स्कोर 200 रन पर छह विकेट था तो हमने सोचा कि हम वहां हावी थे लेकिन सच कहूं तो इन दोनों ने सचमुच शानदार बल्लेबाजी की।’ हम कुछ मौकों पर चूक गए और मुझे लगता है कि कुछ मौके हमने बनाए थे। अगर हम इन मौकों को हासिल कर लेते तो इससे थोड़ा अंतर पैदा हो सकता था।’

वॉशिंगटन-शार्दुल ने पासा ही पलट दिया : पॉन्टिंग
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने निचले क्रम में वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर की अनुशासित और शानदार बल्लेबाजी की तारीफ की जिससे भारतीय टीम सीरीज के चौथे और निर्णायक टेस्ट मुकाबले में बनी हुई है। पॉन्टिंग ने ‘क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू’ से कहा कि उन्होंने बल्लेबाजी के दौरान जिस तरह का जज्बा और धैर्य दिखाया वह शानदार था। उन्होंने जोखिम नहीं उठाया। वह साझेदारी शानदार थी, बिलकुल वैसी जिसकी उस समय भारतीय टीम को जरूरत थी। वे कुछ टेस्ट के अनुभव के साथ ऐसा करने में सफल रहे। ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी में आक्रमकता की कमी थी और तेज गेंदबाजों को भारतीय निचले क्रम के खिलाफ अधिक शॉटपिच गेंदों का इस्तेमाल करना चाहिए था।

 

 

 

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