… तो गावस्कर-तेंदुलकर के बेटे टीम इंडिया में खेल रहे होते

नई दिल्ली : होनहार एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद से बॉलिवुड समेत तमाम क्षेत्रों में भाई भतीजावाद यानी नेपोटिज्म पर चर्चा हो रही है। ऐसे में पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने इस बात से इनकार किया है कि भारतीय क्रिकेट में नेपोटिज्म जैसा कुछ है। उन्होंने इसके लिए महान सुनील गावसकर और सचिन तेंडुलकर के उदाहरण भी दिए। आकाश चोपड़ा ने भारतीय क्रिकेट में नेपोटिज्म से इनकार करते हुए कहा कि, अगर क्रिकेट में नोपोटिज्म का असर होता तो रोहन गावसकर, जो कि सुनील गावकसर के बेटे हैं, काफी समय तक क्रिकेट खेलते, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जब उन्होंने भारत के लिए खेलना शुरू किया तो उसकी वजह बंगाल के लिए किया गया उनका शानदार प्रदर्शन था।’उन्होंने आगे कहा- सुनील गावसकर ने अपने बेटे को मुंबई से खेलने नहीं दिया था। यही बात सचिन तेंडुलकर के बेटे अर्जुन के बारे में भी कही जा सकती है। उन्हें कुछ भी परोसा नहीं जा रहा है। अर्जुन अगर भारत या मुंबई रणजी टीम में खेलेंगे तो अपने प्रदर्शन की बदौलत ही खेलेंगे। उच्चतम स्तर पर कोई समझौता नहीं है। मुझे नहीं लगता कि अन्य क्षेत्रों की तुलना में क्रिकेट में भाई-भतीजावाद प्रासंगिक है। उल्लेखनीय है कि बड़े-बड़े रेकॉर्ड अपने नाम रखने वाले सुनील गावसकर के बेटे रोहन भारत के लिए महज 11 वनडे ही खेल सके थे। दूसरी ओर, अर्जुन तेंडुलकर मुंबई रणजी टीम में जगह बनाने के लिए प्रयासरत हैं। 6 फीट से अधिक लंबे अर्जुन तेज गेंदबाज के साथ-साथ अच्छे बैट्समैन भी हैं। वह इंग्लैंड टीम को नेट पर बोलिंग कर चुके हैं। जॉनी बेयरस्टॉ उनकी गेंद से चोटिल हो गए थे। आईपीएल में मुंबई की टीम के नेट सेशन में भी हिस्सा लेते हैं, लेकिन अभी उनके पास किसी भी फ्रैंचाइजी का कॉन्ट्रैक्ट नहीं है।

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