कोरोना काल में आर्थिक परेशानी से घिरी मुंबई में जूनियर टेबल टेनिस खिलाड़ी स्वस्तिका घोष

नौ वर्ष की उम्र में कैडेट राष्ट्रीय चैम्पियन बनी थी स्वस्तिका

कोलकाता : दुनिया की पांचवें नंबर की जूनियर टेबल टेनिस खिलाड़ी स्वस्तिका घोष को कोरोना लॉकडाउन के कारण आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। उनका परिवार मुंबई में कमरे का किराया भी नहीं दे पा रहा जिसकी वजह से वापिस बंगाल लौटने की सोच रहे हैं। स्वस्तिका के पिता और कोच सह अभ्यास जोड़ीदार संदीप चार महीने से बेरोजगार हैं और नवी मुंबई में कमरे का किराया नहीं दे पा रहे। वह नेरूल में डीएचवी पब्लिक स्कूल में टेबल टेनिस कोच थे लेकिन लॉकडाउन के कारण काम और वेतन नहीं मिल रहा। उन्हें अपने प्रोविडेंट फंड की सारी बचत खर्च करनी पड़ी।

बंगाल वापस लौटने की तैयारी 

उन्होंने कहा,‘‘ स्वस्तिका को रोज करीब 1200 रूपये के फूड सप्लीमेंट देने होते हैं क्योंकि वह छह घंटा अभ्यास करती है।अब सब बंद हो गया है। लॉकडाउन जारी रहा तो हमें बंगाल लौटना पड़ेगा।’ मुंबई में 1992 से लेवल टू के कोच संदीप ने कहा,‘‘मेरे प्रोविडेंट फंड में करीब 60000 रूपये थे जो खर्च हो गए। मैने अपने ससुराल से उधार लिया। अब हमारे पास कुछ पैसा नहीं है और अभ्यास जारी नहीं रख सकते।’’

केंद्र और राज्य सरकार को भी लिखा है पत्र 

उन्होंने कहा,‘ मैं उम्मीद करता हूं कि स्कूल खुले और अभ्यास बहाल हो वरना सब कुछ खत्म हो जायेगा।’ नौ वर्ष की उम्र में 2013 में कैडेट राष्ट्रीय चैम्पियन बनी स्वस्तिका की विश्व जूनियर रैंकिंग जनवरी 2018 में 278 थी जो इस साल अप्रैल में पांच तक पहुंच गई। वह अभी भारत की शीर्ष जूनियर खिलाड़ी है। संदीप ने कहा,‘ मैने केंद्र और राज्य सरकार के अलावा महाराष्ट्र टेबल टेनिस महासंघ को भी लिखा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मैने खेल मंत्री किरेन रीजीजू और राज्य खेल विभाग को भी लिखा लेकिन जवाब नहीं आया।’

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