कुंबले का ‘पुराना कर्ज’ है वीरेंद्र सहवाग पर

नई दिल्लीः भारतीय टीम के मौजूदा कोच अनिल कुंबले और पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग नए कोच के पद के लिए आमने-सामने हैं। देखा जाए तो यह दोनों ही भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी रह चुके हैं और दोनों के आंकड़े भी बहुत अच्छे हैं। लेकिन कुंबले पहले भारतीय टीम से जुड़े थे और वे अपने कप्तानी के समय सहवाग पर बहुत मेहरबान भी थे।
यह है अहसान…
साल 2007 में जब भारतीय टीम को आस्ट्रेलिया के दौरे पर जाना था। सहवाग इस दौरे के लिये घोषित 30 संभावितों में भी शामिल नहीं थे। वर्ष 2007 में वेस्टइंडीज में हुए विश्वकप में भारतीय टीम के खराब प्रदर्शन के बाद सहवाग को टेस्ट और वनडे दोनों ही टीमों से बाहर हो जाना पड़ा था।
भारतीय टीम आस्ट्रेलिया जाने वाली थी कि उसी समय नये टेस्ट कप्तान अनिल कुंबले सहवाग के लिये जैसे भगवान के भेजे दूत की तरह आये। उन्होंने चयनकर्ताओं और बीसीसीआई से जोर देकर कहा कि उन्हें इस सीरीज के लिये सहवाग की जरूरत है। लोगों ने आश्चर्य जताया कि जो 30 संभावितों में नहीं है उसे टीम में कैसे शामिल किया जा सकता है लेकिन कुंबले अपनी बात पर अड़े रहे और उनकी जिद ने भारतीय क्रिकेट में एक नया इतिहास बना दिया।
सहवाग को इस दौरे में पहले दो टेस्टों में खेलने का मौका नहीं मिला। उन्हें पर्थ में तीसरे टेस्ट में भारतीय टीम में शामिल किया गया जिसमें उन्होंने 29 और 43 रन बनाये और गेंदबाजी करते हुए एडम गिलक्रिस्ट तथा ब्रेट ली के विकेट लिये। भारत ने यह टेस्ट 72 रन से जीत लिया।  एडिलेड में खेले गये चौथे टेस्ट में सहवाग अपने पूरे रंग में थे और उन्होंने पहली पारी में 63 रन बनाये और दूसरी पारी में 151 रन ठोक डाले। यह मैच ड्रा रहा। सहवाग के करियर के लिये ये दो टेस्ट टर्निंग प्वाइंट साबित हुए और उन्होंने भारतीय टीम में धमकदार वापसी कर ली और इस वापसी का श्रेय सिर्फ कुंबले को जाता है।
वापसी के बाद शानदार फार्म में लौटे वीरू
इस सीरीज को खेलकर लौटने के बाद भारत को दक्षिण अफ्रीका से घरेलू सीरीज खेलनी थी। सहवाग ने चेन्नई में खेले गये पहले टेस्ट में 304 गेंदों पर 42 चौकों और पांच छक्कों की मदद से 319 रन ठोक डाले। सहवाग ने अपने इस तिहरे शतक को मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ 2004 में बनाये गये तिहरे शतक से बेहतर बताया। इसके साथ ही वह दो तिहरे शतक बनाने में आस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज सर डान ब्रेडमैन की श्रेणी में आ गये।
सहवाग के लंबे करियर के पीछे है कुंबले
सहवाग का करियर इसके बाद 2013 तक चला। इतिहास के सबसे खतरनाक ओपनर सहवाग के लिये कुंबले की वह पहल एक ऐसा कर्ज बन गयी जो शायद वह अपने जीवन में कभी नहीं उतार पायेंगे। सहवाग ने 2016 में अपने जन्मदिन पर कुंबले की बधाई स्वीकार करते हुए कहा था,’ मेरे विचार में आप भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ कप्तान रहे और संभवतः सर्वश्रेष्ठ कोच भी।’ लेकिन आज इसे विडंबना कहें या हालात की मजबूरी, भारतीय टीम के कोच के लिये कुंबले और सहवाग ही आमने-सामने हैं।

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