इंग्लैंड दौरे पर महिला टीम को नहीं भेजने का फैसला लापरवाही नहीं : शांता रंगास्वामी

नयी दिल्ली : बीसीसीआई की शीर्ष परिषद की सदस्य शांता रंगास्वामी ने कहा कि महिला टीम को इंग्लैंड में प्रस्तावित त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए भेजने से मना करने पर इसे बोर्ड की उपेक्षा नहीं समझी जानी चाहिए। उन्होंने सोमवार को कहा कि जो भी बोर्ड की मंशा पर सवाल उठा रहा है उसे स्थिति के सामान्य होने का इंतजार करना चाहिए। बीसीसीआई ने कोविड-19 के कारण इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए महिला टीम नहीं भेजने का फैसला किया जबकि वह सितंबर से नवंबर तक यूएई में आईपीएल की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। रंगास्वामी ने कहा, ‘‘ यह उपेक्षा करने का मामला नहीं है। आपको मैच फिटनेस हासिल करने के लिए कम से कम छह सप्ताह का समय चाहिए और देश के ज्यादातर हिस्से में कोविड-19 को देखते हुए क्या शिविर लगाना संभाव है? आपको इंग्लैंड में 14 दिनों तक पृथकवास में भी रहना होगा।’’ रंगास्वामी ने कहा, ‘‘ हमारे पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं था। कोविड-19 ने दुनिया भर के खेल को प्रभावित किया है, महिला क्रिकेट पर इसका और अधिक प्रभाव है। मेलबर्न में टी20 विश्व कप के फाइनल में रिकार्ड संख्या में दर्शकों के आने के बाद हम फिर से कुछ साल पीछे चले गये हैं। यह दुखद है।’’ रंगास्वामी ने कहा, ‘‘ऐसा लग रहा है कि प्रकृति भी महिला क्रिकेट के खिलाफ साजिश कर रही है। पिछले साल आईपीएल महिला चैलेंज में तीन टीमें थी और इस साल इसे चार टीमों का होना था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आईपीएल प्रदर्शनी मैचों की तुलना में इंग्लैंड जाना ज्यादा जरूरी था। इंग्लैंड दौरे से विश्व कप की अच्छी तैयारी होती।’’ रंगास्वामी ने कहा कि मौजूदा माहौल में बीसीसीआई की खेल (महिला क्रिकेट) के प्रति प्रतिबद्धता को नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ कोविड-19 के बाद महिला क्रिकेट को लेकर उनकी प्रतिबद्धता का पता चलेगा।

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