बांग्ला में विज्ञान को नया आयाम: कोलकाता के छात्रों ने दिखाया विज्ञान मॉडल में हुनर

बांग्ला में विज्ञान को नया आयाम: कोलकाता के छात्रों ने दिखाया विज्ञान मॉडल में हुनर
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बांग्ला माध्यम के छात्रों ने विज्ञान के प्रति अपनी समझ और रचनात्मकता का शानदार प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया कि भाषा कभी भी ज्ञान की राह में बाधा नहीं बन सकती। कोलकाता और महेशतला के 13 बंगाली-माध्यम सरकारी स्कूलों के कक्षा 11 और 12 के लगभग 280 छात्रों ने न्यू अलीपुर मल्टीपरपज़ स्कूल एलुमनाई एसोसिएशन (NAMSAA) द्वारा आयोजित विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बांग्ला भाषा के माध्यम से विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों में रुचि और दक्षता को बढ़ावा देना था। इस मौके पर प्रसिद्ध वैज्ञानिक और एम. पी. बिड़ला तारामंडल के पूर्व निदेशक डॉ. डेबिप्रसाद दुआरी ने “ए जर्नी थ्रू द कॉसमॉस” शीर्षक से एक आकर्षक ऑडियो-विज़ुअल प्रस्तुति दी।

यह कहा डॉ. दुआरी ने
डॉ. दुआरी, जो नासा से भी जुड़े रहे हैं, ने अपने संबोधन में रवीन्द्रनाथ टैगोर के 1937 के निबंध ‘विश्वपरिचय’ का उल्लेख करते हुए बताया कि टैगोर ने जटिल खगोल विज्ञान को आम लोगों के लिए कितनी सहज भाषा में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा, “विज्ञान को अपनी भाषा में समझना आत्मविश्वास बढ़ाता है और यही वैज्ञानिक सोच की असली जड़ है।” उन्होंने यह भी बताया कि इसरो ने अब तक अपने 91% उपग्रहों को सटीक कक्षा में स्थापित किया है, जो नासा के 72% की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

कार्यक्रम में छात्रों ने विविध विज्ञान मॉडल प्रस्तुत किए — जैसे सौर ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े प्रोजेक्ट्स। इसके बाद एक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद किया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। NAMSAA के एक सदस्य ने कहा, “हर छात्र में प्रतिभा है; हमारा उद्देश्य उन्हें मंच देना और बांग्ला माध्यम के विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।”

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