शरीर दर्द को बिल्कुल ना करें नजरअंदाज, यहां जानिए इसके कारण और उपाय

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कोलकाता: कुछ व्यक्तियों को शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द की शिकायत आजकल आम है। सर्दी-जुकाम की तरह शरीर दर्द रोजाना की साधारण सी बात है। गर्दन दर्द, सिरदर्द, कमर दर्द, पैरों की पिण्डलियों में दर्द, जंघाओं में दर्द, हाथ दर्द, दांत दर्द, कान दर्द इत्यादि वे दर्द हैं जिनसे एक बड़ी जनसंख्या पीड़ित है। कुछ दर्द ऐसे हो सकते हैं जिनमें आदमी दर्द की उपेक्षा करके अपने रोजमर्रा का जीवन जीता रहता है परंतु कुछ ऐसे दर्द भी हैं जिनको अनदेखा करना अनुचित ही नहीं, जीवन के साथ खिलवाड़ भी है जैसे हृदयशूल, पेडू का दर्द, गले का दर्द, पेट के निचले हिस्से में तीव्र चुभन या दर्द, हड्डियों में हमेशा बने रहने वाला दर्द क्योंकि ये कुछ खास दर्द किसी भी समस्या का घोतक होते हैं जिन्हें सावधानी से संभालनेे और डाॅक्टर की सलाह की आवश्यकता पड़ती है। कुछ साधारण दर्दों के बारे में कुछ विशेष जानकारी और उनसे छुटकारा पाने के उपायों पर जानकारी प्रस्तुत है

 
-शरीर दर्द के कारण
सर्वप्रथम हमें दर्द का कारण जानने का भरसक प्रयत्न करना चाहिए। आज तक लोग घंटों तक रीढ़ की गलत मुद्राओं में बैठे रहते हैं। विशेषकर कंप्यूटर पर कार्य करने में या गलत अवस्था में सोते हैं या अजीबोगरीब अंदाज में बैठ कर टीवी देखते हैं, लंबी-लंबी यात्रएं करते हैं, घर का कामकाज करते हैं। बैठे-बैठे ही सो जाते हैं या भारी भरकम सामान उठाने जैसी अनेक दैनिक गतिविधियां करते हैं जिससे रिपीटिव स्ट्रेन इंजरी (आरएसआई) अर्थात रीढ़ पर अत्यधिक वजन व तनाव आने से बार-बार दर्द उठने की समस्या उत्पन्न हो जाती है।इसी प्रकार गर्दन पर लंबे समय तक अनावश्यक दबाव पड़ना जैसे मोबाइल का अधिक प्रयोग, कंप्यूटर स्क्रीन को झुक-झुक कर देखना और गर्दन के नीचे भारी-भारी तकिये लगाकर सोना (या मोड़ मोड़ कर तकिये की कई परतें कर के सोना), रेल या बस यात्रा करते समय गर्दन को खराब स्थिति में रखना या फिर झटके लगना, इस कारण से बहुत बड़ी जनसंख्या को छोटी उम्र में ही सरवाइकल स्पांडिलाइटिस/ स्पॉनडिलोसिस। (सरवाइकल रीढ़ के जोड़ों में एक अपकर्षक डीजेनेरेटिव (कानिक वियरिंम) विकार उत्पन्न हो जाता है जिससे सरवाइकल रीढ़ की हड्डियों और जोड़ों के अंतर्गत डिस्क और गोटियों के मंध्य) का दर्द होने लगता है।
शरीर दर्द के प्रकार
 
शरीर दर्द के उपरोक्त वर्णित प्रकारों के अतिरिक्त निम्न प्रकार भी हो सकते हैं-
●गर्दन के पीछे लगातार या रुक-रुक कर दर्द उठना जो कपाल, कंघों और भुजाओं और हाथों की ओर बढ़ता है तथा गर्दन हिलाने पर बहुत तेज दर्द होता है।
●सिर के पीछे गर्दन से थोड़ा ऊपर प्राय: तेज और बार-बार सिर दर्द शुरू होना जो बाद में सिर के ऊपरी ओर बढ़ने लगता है।
●रात्रि विश्राम के बाद गर्दन में ऐंठन।
●भुजाओं, हाथों और अंगुलियों के बीच सुन्नता, सुई जैसी चुभन महसूस करना।
●चक्कर आना, चिड़चिड़ापन तथा थकान महसूस करना जिससे नींद आने में बाधा पड़ती है और आपकी कार्य क्षमता प्रभावित होती है।●रीढ़ की हड्डी दबाये जाने पर साधारण रूप से ब्लेडर या आंतों पर कम नियंत्रण होना। कृपया ध्यान रखें ये सब सरवाइकल स्पांडिलाइटिस के कारण हैं और यदि किसी को भी उपरोक्त लक्षणों में से कोई लक्षण दिखाई पड़ता है या महसूस किया जाता है तो उसका स्थाई इलाज करवायें और उक्त समस्या को स्थाई विकलांगता के लिए आगे न बढ़ने दें।
 
शरीर दर्द को दूर करने के उपाय 
सर्वप्रथम हमें उन सभी कारणों का अध्ययन करना चाहिए जिनसे शरीर दर्द की समस्याएं पैदा होती हैं। हर व्यक्ति को अपने क्रियाकलापों की सूची बनानी पड़ेगी और देखना पड़ेगा कि वास्तव में क्या वे अपने शरीर का दुरुपयोग करने के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं या फिर उनकी बाध्यताएं हैं। यदि आप अपने आपसे अपने शरीर को सही अवस्थाओं मेें रखकर अपना दैनिक कार्य करें तो सर्वोत्तम है। इस पर आप को अपनी नौकरी अथवा कार्यों के कारण शारीरिक अवस्थाओं को मानक की अपेक्षा गलत स्थितियों में बैठने की कोई बाध्यताएं हैं तो उन्हें थोड़े से प्रयास से दूर किया जा सकता है उदाहरणार्थ -यदि आपकी कम्प्यूटर स्क्रीन कुर्सी पर बैठने के बाद भी आपकी आंख की सीध में नहीं है और आपको झुक कर कम्प्यूटर को देखना पड़ रहा है तो स्क्रीन को ऊपर उठाने का प्रबंध करें।
● डाॅ. सान्त्वना मिश्रा(स्वास्थ्य दर्पण)मोबाइल पर कार्य करते समय भी इस बात का ध्यान रखें। यात्रा में जहां तक संभव हो, न सोयें। यदि सोना आवश्यक ही हो तो सिर और गर्दन के नीचे भारी-भारी बैग न रखें। शरीर में मोच आने की भी परिस्थितियां बनें जैसे – झटके से उठना, घूमना या फिर बैठना उनका ध्यान रखें और न करें।डाॅक्टर से कब मिलें
●यदि गर्दन और कमर के पीछे दर्द, सुन्नता व खिंचाव महसूस हो जो भुजाओं, अंगुलियों और कमर के नीचे की ओर बढ़ता हुआ हो।●मांसपेशियों में ऐंठन,झटका, फड़कन व संकुचन या इनमें से कोई एक।
●भुजाओं के मध्य दर्द, गर्दन में ऐंठन महसूस होना या करना।
●सिरदर्द, चक्कर आना (वर्टिगो) सिर घूमना।
●रीढ़ में चोट लग जाना या अपनी मूल जगह से खिसक जाना या फिर स्पाइनल कार्ड के आधार में स्थित छोटी-छोटी त्रिभुजाकार हड्डियों में दर्द महसूस करना जो पूरे रीढ़ में ऊपर की ओर बढ़ता है।
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