विटामिन-सी का सर्वोत्तम स्रोत नींबू एक बहुउपयोगी फल है। इसका उपयोग भोजन के साथ सलाद में, शर्बत में, अचार एवं सौंदर्य सामग्रियों के अलावा औषधियों में भी होता है। इसका सेवन किसी भी ऋतु में किया जा सकता है। इसे खाया-चूसा, शरीर पर लगाया व मला जाता है। नींबू सूखा हो या ताजा, कच्चा हो या पका, उसका अपना विशिष्ट उपयोग है। गर्मी में यह शरीर को ठंडक देता है और सर्दी में ठंड के प्रकोप को दूर भगाता है।
नींबू के गुण व पोषक तत्वः-
नींबू पाचक, दर्दनाशक, रक्तशोधक, रोग निवारक एवं बलवर्धक है। यह स्नायुतंत्रा की गड़बडि़यों का नाश करके दिल-दिमाग व जिगर को शांत रखता है। नींबू में सिट्रिक अम्ल, प्राकृतिक शर्करा, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम और विटामिन-सी होते हैं। बड़े नींबू की अपेक्षा छोटे नींबू में विटामिन सी अधिक होता है।
आवश्यक सावधानियां-
नींबू जितना लाभदायक है, उसके बीज उतने ही हानिकारक हैं। इसे न मुंह में डालें, न पेट में जाने दें। नींबू के रस का ज्यादा सेवन करने से उसमें मौजूद अम्ल दांतों के इनेमल को हानि पहुंचा सकते हैं। नींबू चूसने से मुंह की लार बनाने वाली ग्रंथियां सुस्त पड़ जाती हैं, अतः इसका सेवन खाद्य या पेय पदार्थों में निचोड़ कर करें। नींबू या उसके रस को गर्म न करें। व्याधि के निदान हेतु यदि गर्म करना ही पड़े तो अधिक न करें। रसदार, छोटा और पीला नींबू अधिक उपयोगी होता है।
विविध रोगों के इलाज में नींबू का उपयोगः-
अपच गरिष्ठ पदार्थ अधिक खाने अथवा समय-बे समय खाने से आंतों की क्रिया सुस्त पड़ जाए तो
बदहजमी हो जाती है। कब्ज, अतिसार, अजीर्ण, कमजोरी आदि कई रोगों को आमंत्रण मिलता है।
अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके कप में रखें। उसमें टुकड़ों के डूबने भर तक नींबू का रस निचोड़ कर उससे सेंधा नमक छिड़क कर दो घण्टे तक रखें। इन्हें खाकर थोड़ा सा निगल लें। अजीर्ण दूर होकर पाचन क्रिया सही हो जायेगी।
नींबू का अचार पंगु पाचन-क्रिया को भी दुरुस्त कर देता है। बेदाग निंबुओं में चार चीरे ऐसे लगाएं कि वह नीचे से जुड़ा रहे। आवश्यकतानुसार मात्रा में चीरे हुए नींबू मर्तबान में डाल दें और ऊपर से सेंधा नमक बुरक दें। अब इसे दो दिन धूप दिखाएं। अचार तैयार है। जठराग्नि को तेज करने के लिए और कुछ लेने की जरूरत नहीं।
कब्जः- नींबू की शिकंजी, चीनी के बदले सेंधा नमक डालकर बनाएं। सुबह-शाम दो-दो गिलास खाली पेट लें।
पेट में पड़ा मल ढीला पड़ेगा और कब्ज दूर होगा।
पेट दर्दः- सनाय पत्ती, त्रिफला, सोंठ व काले नमक को समान मात्रा में लेकर कूट पीस लें। इसे नींबू के रस में अच्छी तरह घोंटकर छोटी-छोटी गोलियां बनाएं। जब आवश्यकता हो तो 2-2 गोली पानी से सुबह-शाम लें।
पेट के कीड़ेः- छाया में सुखाए गए नींबू के छिलकों का काढ़ा बनाएं। इस काढ़े को छानकर गुनगुना ही पीने पर पेट के सारे कीड़े मल के साथ बाहर आ जाते हैं।
बच्चेः- बच्चे की बदहजमी दूर करने के लिए नींबू के वृक्ष की जड़ घिसकर उसे दूध में मिलाकर बच्चे को पिलाएं। दूध पचने लगेगा और वमन नहीं होगा।
टांसिल्सः- अनन्नास के टुकड़े पर नींबू का रस निचोड़कर खाने से यह रोग चला जाता है।
दंत सौंदर्यः- छाया में सुखाए गये नींबू के छिलकों को जलाकर अच्छी तरह पीस लें। इसे छानकर इसमें नमक मिला लें। इस मंजन से सुबह व सोने से पहले दांत साफ करें। सप्ताह दस दिन में ही दांतों पर जमी मैल की परत छंट जायेगी। दांत स्वच्छ व चमकीले हो जायेंगे।
डॉ. विकास मानव (स्वास्थ्य दर्पण)

