

साफ-सुथरा, हंसता मुस्कुराता बच्चा सभी को अच्छा लगता है। इन सब के लिए बच्चे
का स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी होता है। यदि बच्चा स्वस्थ है तो वह प्रसन्न रहेगा और
स्वस्थ रहने के लिए बच्चे को साफ सुथरा रखना अति आवश्यक है। हर मां-बाप की
इच्छा होती है कि उनका बच्चा स्वस्थ रहे और उसका शारीरिक विकास ठीक रहे जिससे
बच्चे का व्यक्तित्व निखरा रहे। इन सब बातों के लिए माता-पिता को उनका पालन
पोषण करते हुए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।
प्रतिदिन शिशुओं की सरसों के तेल या ऑलिव ऑयल से मालिश करनी चाहिए।
मालिश करते समय बच्चों को हल्का-फुल्का व्यायाम भी करवाएं।
मालिश के पश्चात बच्चों को मौसम के अनुसार स्नान करवायें। सर्दियों में छोटे बच्चों
को एक दिन छोड़कर गुनगुने पानी से नहलायें, गर्मियों में प्रतिदिन ताजे पानी से
नहलायें। सप्ताह में एक बार नीम की पत्तियां उबाल कर पानी छानकर ताज़े पानी में
मिलाकर नहलाएं जिससे बच्चों को त्वचा रोग नहीं होंगे।
सर्दियों में बच्चों को धूप में लिटाएं या बैठाएं। यह ध्यान रखें कि बच्चों के चेहरे पर
धूप न लगे। धूप से हड्डियों में मज़बूती आती है क्योंकि सूर्य की किरणों से विटामिन
डी मिलता है।
बच्चों के नाखूनों को बड़ा न होने दें। जहां कटने लायक नाखून हों, काट दें। बड़े
नाखून बच्चे खुद की आंख में या चेहरे पर मार सकते हैं।
छोटे बच्चों को दूध दो-दो घंटों के अंतराल में पिलाएं। बीच में मांग करने पर बच्चे को
दूध अवश्य पिलाएं। मां को चाहिए कि बच्चे को अधिक से अधिक अपना दूध पिलाए।
मजबूरीवश बोतल से दूध पिलाने पर बोतल व निपल की सफाई पर खास ध्यान दें।
प्रत्येक फीड देने से पहले बोतल व निपल को अच्छी तरह उबालें।
थोड़ा बड़ा होने पर बच्चों को ठोस आहार दें। ठोस आहार दिन में तीन बार दें। यदि
बच्चा सब्जी, दाल खाने में आनाकानी करे तो दलिये, खिचड़ी में दाल सब्जी मैश कर
डालें। चपाती या परांठा दाल के आटे वाला दें।
बच्चे को जबरन न खिलाएं। प्यार से कोशिश अवश्य करें क्योंकि जबरदस्ती खिलाने से
बच्चे में खाने के प्रति अरुचि बढ़ेगी और बच्चा खाने के बाद उल्टी के रूप में खाना
बाहर निकाल देगा।
छोटे बच्चे की जीभ प्रतिदिन साफ नरम कपड़े से साफ करें। दांत आने पर दांतों की
भी कपड़े से सफाई करें। दो साल की आयु के पश्चात ब्रश से स्वयं उसके दांत साफ करें
जब तक बच्चा खुद ब्रश करना नहीं सीखता।
पेट भरा होने पर बच्चा यदि लगातार रोता रहे तो समझें कि उसकी तबीयत ठीक नहीं
है या बच्चा खाने में बार-बार अरुचि दिखाए तो इसका अर्थ है कि उसे कुछ तकलीक है।
बच्चे को खांसी-जुकाम होने पर लापरवाही न बरतें। डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।
बच्चे को गीला न रखें। पता चलने पर तुरंत उसके वस्त्रा बदलें नहीं तो बच्चे को रैश
हो जाएंगे।
बच्चों को वस्त्र ढीले पहनायें। टाइट वस्त्रों से बच्चों का विकास ठीक नहीं होता और वे
स्वतंत्रतापूर्वक हाथ-पांव नहीं चला सकते।
सर्दियों में बच्चों के वस्त्र प्रतिदिन बदलें। न नहलाने की स्थिति में बच्चे को स्पंज
कर सारे वस्त्र बदलें। गर्मियों में दिन में बच्चों के वस्त्र दो बार अवश्य बदलें।
बच्चों के बिस्तर पर किसी को नंगे पाव न चढ़ने दें। इससे बच्चे को एलर्जी हो सकती
है।
बच्चों को तेज़ धूप, हवा और सर्दी से बचा कर रखें।
घर हमेशा साफ रखें। छोटे बच्चों के होने पर फर्श दिन में दो बार साफ करें। फर्श पर
गिरी हुई वस्तु को न स्वयं खायें, न बच्चे को खाने दें। नीचे गिरी वस्तु खाने से बच्चा
बीमार पड़ सकता है।
बच्चों के खिलौने धोकर खेलने को दें। बच्चों को खिलौने मुंह में ज़्यादा न ले जाने दें।
नुकीले खिलौने बच्चों को खेलने के लिए न दें।
बच्चों को सूती वस्त्रा पहनायें।
छोटे बच्चों को घर पर अकेला छोड़ कर कहीं भी न जाएं। नीतू गुप्ता (उर्वशी)