सुप्रीम कोर्ट में जोसेफ समेत तीन हुई महिला जजों की संख्या

नईदिल्लीः मंगलवार को मुख्य जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस के एम जोसेफ को पद की शपथ दिलाई। जस्टिस इंदिरा बनर्जी सुप्रीम कोर्ट के 68 साल के इतिहास में आठवीं महिला जज हो गई हैं साथ ही पहली बार ऐसा हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट में एक साथ तीन महिला जज होंगी। इससे पहले एक समय मे अधिकतम दो महिला जज ही सुप्रीम कोर्ट में रही हैं। इन तीन नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट मे जजों की संख्या 25 हो गई है जबकि सुप्रीम कोर्ट में जजों के स्वीकृत पद 31 हैं। मालूम हो ‌कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ ने साल 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने वाले मोदी सरकार के फैसले को पलट दिया था। जिसके बाद से वह चर्चा का केंद्र रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर काफी लंबे समय तक चले विवाद के बीच जस्टिस के. एम. जोसेफ समेत कुल तीन जजों ने आज देश की सबसे बड़ी अदालत के जज के रूप में शपथ ली।
जोसेफ के तीसरे नंबर होने से उठा विवाद
हालांकि, शपथ से पहले भी इसको लेकर विवाद रहा। कई वरिष्ठ जजों ने जस्टिस के. एम. जोसेफ की वरिष्ठता घटाने को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की है। लेकिन केंद्र अपने रुख पर अडिग है, इसलिए आज शपथ ग्रहण पूर्व में तय कार्यक्रम के आधार पर ही हुआ। इस मामले को लेकर सोमवार को कई सीनियर जजों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा से मुलाकात की थी। चीफ जस्टिस ने उन्हें मामले को केंद्र के सामने उठाने की बात भी कही थी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में तीन जज नियुक्त होने के मामले में उतराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के. एम. जोसेफ को वरिष्ठता के क्रम में तीसरे नंबर पर रखा गया है। जिसको लेकर आपत्ति जताई जा रही है।
कौन कब बना जज?
जस्टिस इंदिरा बनर्जी 5 फ़रवरी 2002,जस्टिस विनीत सरन 14 फ़रवरी 2002, जस्टिस के एम जोसेफ 14 अक्टूबर 2014,
मालूम हो कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के कई मौजूदा और पूर्व जज अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस कुरियन जोसफ और जस्टिस मदन बी लोकुर ने भी चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को चिट्ठी लिखकर सुप्रीम कोर्ट की गरिमा बचाने और सरकार की मनमानी रोकने के उपाय करने पर जोर दिया था। इन उपायों की तलाश के लिए फुलकोर्ट यानी सभी जजों की मीटिंग बुलाने की मांग की थी। जिस दौरान कोलेजियम ने जस्टिस के. एम. जोसेफ के नाम की सिफारिश की थी, तब सरकार ने कई तरह के तर्क देकर उनका नाम वापस कर दिया था। लेकिन अब लगता है कि सरकार राजी हो गई है।

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