चैत्र नवरात्रि 2019: इस समय इस विधि से करें कलश स्थापना, पढ़े क्या है बीज मंत्र

नई दिल्लीः चैत्र नवरात्र की धूम शनिवार से मच जाएगी। नौ दिन देवी मां की कृपा बरसेगी। मंदिरों और घरों में तैयारी जोर-शोर से की जा रही है। चैत्र नवरात्रि पूजा 6 अप्रैल से प्रारंभ हो जायेगी। यहां जानें इस अवसर पर घट स्थापना का मुहूर्त, व्रत पूजन की विधि और दुर्गा के नौ रूपों के बीज मंत्रों के बारे में। वैसे तो लोग नवरात्रि के पहले दिन पंडितों को घर में बुलाकर कलश की स्थापना करवाते हैं, लेकिन आप यहां दिए गए समय और विधि के अनुसार खुद ही अपने घरों में कलश की स्थापना कर सकते हैं।
कलश स्थापना के लिए सामग्री
मिट्टी का पात्र, लाल रंग का आसन, जौ, कलश के नीचे रखने के लिए मिट्टी, कलश, मौली, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, चावल, अशोका या आम के 5 पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, माता का श्रृंगार और फूलों की माला।
इस प्रकार करें कलश स्थापना
– नवरात्रि के पहले दिन नहाकर मंदिर की सफाई करें या फिर जमीन पर माता की चौकी लगाएं।
– सबसे पहले भगवान गणेश जी का नाम लें।
– मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योत जलाएं और मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालें, उसमें जौ डालें।
– कलश या लोटे पर मौली बांधें और उस पर स्वास्तिक बनाएं।
– लोटे (कलश) पर कुछ बूंद गंगाजल डालकर उसमें दूब, साबुत सुपारी, अक्षत और सवा रुपया डालें।
– अब लोटे (कलश) के ऊपर आम या अशोक 5 पत्ते लगाएं और नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर रखें।
– अब इस कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीचोबीच रख दें।
– अब माता के सामने व्रत का संकल्प लें।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
6 अप्रैल की सुबह 06:19 से 10:26 तक कलश की स्थापना करें।
देवी के नौ बीज मंत्र
नौ दिन के इस विशेष पूजा के लिए विशेष बीज मंत्र होते हैं, जो इस प्रकार हैं –
पहला शैलपुत्री का बीज मंत्र: ह्रीं शिवायै नम:
दूसरा ब्रह्मचारिणी का बीज मंत्र:ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
तीसरा चन्द्रघंटा का बीज मंत्र: ऐं श्रीं शक्तयै नम:
चौथा कूष्मांडा का बीज मंत्र: ऐं ह्री देव्यै नम:
पांचवा स्कंदमाता का बीज मंत्र: ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:
छठा कात्यायनी का बीज मंत्र: क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:
सातवां कालरात्रि का बीज मंत्र: क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:
आठवां महागौरी का बीज मंत्र: श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
नवां सिद्धिदात्री का बीज मंत्र: ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:
13 को महानवमी का व्रत
चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल से प्रारम्भ होकर 14 अप्रैल 2019 दिन रविवार को प्रात 6 बजे तक नवमी तत्पश्चात दशमी तिथि तक होगा। शनिवार को ही प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से दोपहर 2:58 बजे तक होगा। 5 अप्रैल दिन शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर प्रतिपदा तिथि लग रही है। उदया तिथि में नवरात्र का आरम्भ 6 अप्रैल दिन शनिवार से ही माना जायेगा। 12 अप्रैल 2019 को सुबह 10:18 बजे से 13 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह 08:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी। उसके बाद नवमी लगेगी। 13 अप्रैल को महानवमी का व्रत होगा। नवरात्र हवन -पूजन 14 अप्रैल को प्रात 6 बजे के पूर्व किसी भी समय किया जा सकता है । नवरात्र का पारण 14 अप्रैल को सुबह 6 बजे के बाद होगा।
जानें किस दिन क्या भोग लगाएं
वैसे तो माता को सच्चे मन से जो भी भोग लगाओ, वह ग्रहण कर लेती है लेकिन माता दुर्गा को नवरात्र को यह 9 भोग पसंद हैं। मान्यता है कि जगत जननी को इनका भोग लगाने से मनोकामना की पूर्ति होती है। साथ ही बुद्धि व धन-संपदा की भी वृद्धि होती है। आइए जानते हैं किस दिन माता को कौन सा भोग लगाएं…
– नवरात्र के पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। इस दिन मां को गाय के घी भोग लगाने चाहिए। इससे आरोग्य लाभ की प्राप्ति होती है।
– नवरात्र के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। इस दिन जगत जननी को शक्कर का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से चिरायु का वरदान मिलता है।
– नवरात्र के तीसरे दिन मां के तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन माता को दूध का भोग चढ़ाएं और उसे जरूरतमंद को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।
– नवरात्र के चौथे दिन मां के चतुर्थ स्वरूप कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन माता को मालपुआ का नैवेध अर्पण करना चाहिए और उसे जरूरतमंद को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से मनोबल बढ़ता है।
– नवरात्र के पांचवे दिन मां के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा होती है। इस दिन जगत जननी को केले का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है।
– नवरात्र के छठवें दिन मां के षष्टम स्वरूप कात्यानी की पूजा होती है। इस दिन मां भवानी को शहद का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
– नवरात्र के सातवें दिन मां के सप्तम स्वरूप कालरात्रि की पूजा होती है। इस दिन मां भवानी को गुड़ से निर्मित भोग अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से शोक से मुक्ति मिलती है।
– नवरात्र के आठवें दिन मां के अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन माता को नारियल का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
– नवरात्र के नौवें दिन मां के नवम् स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन माता को घर में बने हुए हलवा-पूड़ी और खीर का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य के जीवन में सुख-शांति मिलती है।

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