जब भीगा पैड लेकर किसी के घर नहीं जाते तो क्या मंदिर जाएंगे?ः स्मृति ईरानी

मुंबईः केरल के सबरीमाला पर जारी विरोध और विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि पूजा करने का अधिकार सबको है, लेकिन अपमान करने का नहीं। ईरानी मुंबई में ऑब्जर्वर रिसर्च ऑर्गनाइजेशन और ब्रिटिश डिप्टी हाईकमीशन की ‘यंग थिंकर्स’ सम्मेलन में बोल रही थीं। विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट ने रजस्वला आयु वर्ग (10 से 50) की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी। आदेश के बावजूद इस बार किसी रजस्वला आयु वर्ग (10 से 50) की महिला को प्रवेश नहीं मिल सका।
खून से सने सैनिटरी नैपकिन को लेकर अपने दोस्त के घर जाएंगी
केरल के सबरीमाला मंदिर के पट सोमवार को मासिक पूजा के बाद बंद भी हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘मुझे पूजा करने का अधिकार है लेकिन अपवित्र करने का नहीं।’ उन्होंने आगे कहा ‘मैं मौजूदा केंद्रीय मंत्री हूं इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकती हूं लेकिन क्या आप माहवारी के खून से सने सैनिटरी नैपकिन को लेकर अपने दोस्त के घर जाएंगी? तो आप भगवान के घर पर उसे लेकर क्यों जाना चाहती हैं।’ हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है।

मंदिर में महिलाओं पर प्रतिबंध के लिए पीरियड्स बड़ी वजह
महिलाओं को मंदिर के अंदर नहीं जाने देने के लिए पीरियड्स एक बड़ा कारण माना जाता है लेकिन इसके अलावा कहानियां और भी हैं। माना जाता है कि भगवान अयप्पा ने खुद यह तय किया था कि उनके दर्शन के लिए कौन आ सकता है और कौन नहीं। भगवान के मंदिर में हर साल लाखों पुरुष पहाड़ चढ़कर, नंगे पैर जाते हैं। वे 41 दिन का व्रत करते हैं जिस दौरान स्मोकिंग, शराब, नॉन-वेज, सेक्स और उन महिलाओं से दूर रहते हैं जिनके पीरियड्स चल रहे होते हैं। इसके बाद वह दर्शन के लिए निकलते हैं। मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत मिलने के बाद से ही घमासान मचा हुआ है। कोर्ट के फैसले के बावजूद यहां मंदिर खुलने के बाद से तनाव की स्थिति बनी रही और इस उम्र की महिलाओं को एंट्री नहीं मिल पाई। प्रदर्शनकारियों ने दर्शन के लिए पहुंचने वाली महिलाओं को लौटने पर मजबूर कर दिया।

13 नवंबर को पुनर्विचार की याचिका पर सुनवाई
उधर, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ चुनौती दी गई। इस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन याचिकाओं पर 13 नवंबर को सुनवाई करेगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस. के. कौल की पीठ ने वकील मैथ्यूज जे नेदुम्पारा से कहा कि उसने याचिकाओं को 13 नवंबर को सूचीबद्ध करने के संबंध में पहले ही आदेश पारित कर दिया है।

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