प्रधानमंत्री मोदी ने दी स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि, कहा- भारत निर्माण की प्रेरणा उनसे ही मिलती है

नयी दिल्ली : हमारे देश में कई ऐसे महापुरूष हुए हैं जिनके जीवन और विचारों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। इन महापुरुषों के विचार ऐसे हैं कि निराशा में घिरा व्यक्ति भी यदि उन्हें पढ़े तो उसका जीवन नई ऊर्जा से भर सकता है। इन्हीं महापुरुषों में एक हैं स्वामी विवेकानंद। स्‍वामी विवेकानंद ऐसे महापुरुष हैं जिनके विचार आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं। स्वामी विवेकानंद ने मानवता की सेवा और परोपकार के लिए 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। इस मिशन का नाम विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के नाम पर रखा था। स्वामी विवेकानंद का 4 जुलाई 1902 को निधन हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी उन्हें लोगों के बीच जीवित रखे हुए हैं। विवेकानंद आज ही के दिन 12 जनवरी सन् 1863 को कलकत्ता जो आज कोलकाता के नाम से जाना जाता है, के एक कायस्‍थ परिवार में जन्म हुआ था। स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। विवेकानंद के बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील थे। स्वामी विवेकानंद की जयंती हर साल 12 जनवरी को मनाई जाती है। इस दिन को पूरे देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे।

विवेकानंद ने अपने विचारों से भारत का नाम किया रौशन
स्वामी विवेकानन्द ने अपने विचारों से ना सिर्फ भारत का नाम रौशन किया बल्कि दुनिया में भी देश का मान बढ़ाया था। अमेरिका के शिकागो शहर में दिया गया उनका ओजपूर्ण भाषण आज भी काफी लोकप्रिय है। सन 1893 में उन्होंने शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में दुनिया को हिंदुत्व और आध्यात्म का पाठ पढ़ाया था। यहां उन्होंने भारतीय संस्कृति और भारतीय ज्ञान से दुनिया को रुबरू करवाया था।

शिकागो भाषण के कुछ अंश
स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरुआत प्रिय बहनो और भाइयो से की थी। इसके बाद उन्होंने कहा- आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है। मैं आप सभी को दुनिया की सबसे पुरानी संत परंपरा की ओर से शुक्रिया करता हूं। मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं। उन्होंने कहा, मेरा धन्यवाद उन लोगों को भी है जिन्होंने इस मंच का उपयोग करते हुए कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार भारत से फैला है। स्वामी विवेकानंद ने आगे बताया था कि उन्हें गर्व है कि वे एक ऐसे धर्म से हैं, जिसने दुनियाभर के लोगों को सहनशीलता और स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है।

हम दुनिया के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं
शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन के अपने भाषण में विवेकानंद ने कहा था कि हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही केवल विश्वास नहीं रखते हैं। बल्कि हम दुनिया के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं। मैं गर्व करता हूं कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए गए लोगों को शरण दी है। उन्होंने कहा कि यह बताते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन इजराइलियों की पवित्र स्मृतियां संजोकर रखी हैं, जिनके धर्म स्थलों को रोमन हमलावरों ने तोड़-तोड़कर खंडहर में तब्दील कर दिया था। इसके बाद उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली थी। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि सभी धर्मों के लोगों को शरण दी। मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस धर्म से हूं, उसने महान पारसी धर्म के लोगों को शरण दी। इसके बाद अभी भी उन्हें पाल रहा है। इसके बाद विवेकानंद ने कुछ श्लोक की पंक्तियां भी सुनाई थीं।

पैदल ही पूरे भारत की यात्रा की
स्वामी विवेकानंद ने 25 साल की आयु में गेरुआ वस्त्र धारण कर लिया था। इसके बाद उन्होंने पैदल ही पूरे भारत की यात्रा की। विवेकानंद ने 31 मई 1893 को मुंबई से अपनी विदेश यात्रा शुरू की। मुंबई से वह जापान पहुंचे। जापान में नागासाकी, कोबे, योकोहामा, ओसाका, क्योटो और टोक्यो का उन्होंने दौरा किया। इसके बाद वह चीन और कनाडा होते हुए अमेरिका के शिकागो शहर में पहुंचे थे।

दिन में कम से कम एक बार अपने आप से बात करें
पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान। ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है। दिन में कम से कम एक बार अपने आप से बात करें। अन्यथा आपने दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति से होने वाली मुलाकात को छोड़ रहे हो। जो लोग आपकी मदद करते हैं उन्हें कभी मत भूलो। जो आपको प्यार करते हैं उनसे कभी घृणा न करो। जो लोग तुम पर भरोसा करते हैं उन्हें कभी भी धोखा न दो। जब तक तुम अपने आप पर भरोसा नहीं कर सकते तब तक तुम्हें ईश्वर पर भरोसा नहीं हो सकता।

स्वामी विवेकानंद के कुछ विचार..
किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं।
सबसे पहले यह अच्छे से जान-समझ लो कि हर बात के पीछे एक मतलब होता है।
उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।
सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
दिल और दिमाग के टकराव के बीच हमेशा दिल की सुनो।
अगर तुम्हें खुद पर भरोसा नहीं है तो तुम सबसे बड़े नास्तिक हो।
सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए, पर किसी के लिए भी सच्चाई नहीं छोड़ना चाहिए।
एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
कभी भी यह मत सोचो कि तुम्हारे लिए, तुम्हारी आत्मा के लिए कुछ भी नामुमकिन है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि
वहीं इस मौके पर देश भर के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि दी और उन्हें नम किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर एक वीडियो के जरिए देश की जनता को संदेश भी दिया और ट्वीट करते हुए कहा कि वह स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उन्हें नमन करते हैं। स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्वीट करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार और आदर्श करोड़ों भारतीयों, विशेषकर हमारे युवाओं को प्रेरित और उत्साहित करते हैं। भारत के निर्माण की प्रेरणा हमें उनसे ही मिलती है। उनसे हमें ऐसे भारत के निर्माण की प्रेरणा मिलती है जो मजबूत, जीवंत, समावेशी हो और कई क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व करने वाला हो। मालूम हो कि भारत में स्वामी विवेकानंद की जयंती को युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

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