तीसरी बार बने अशोक गहलोत मुख्यमंत्री

राजस्‍थान : राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आने के बाद मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राजस्‍‍‍‍‍थान में मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट और पूर्व सीएम अशोक गहलोत मुख्य दावेदार थे। जो लंबी कश्मकश के बाद यह निर्णय भी हो गया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री बनेंगे। राजस्थान में मुख्यमंत्री के नाम पर लंबी कश्मकश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट पर भारी पड़े। एक बार फिर जब राज्य में कांग्रेस आलाकमान के समक्ष 2008 जैसी स्थिति खड़ी हो गई, तब पार्टी ने अपने जादूगर पर ही भरोसा जताया है जो सबको साथ लेकर चल सके। राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के नाम पर राहुल गांधी की अंतिम मुहर लग गई है। सूत्रों के अनुसार बता दें कि राहुल गांधी ने अशोक गहलोत पर भरोसा जताया है। वहीं बता दें कि शाम चार बजे इस नाम का आधिकारिक एलान जयपुर में किया जा सकता है। इससे पहले अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात की थी। अब राहुल गांधी मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात करेंगे। यहां मुख्यमंत्री पद के दो दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ माने जा रहे हैं। दरअसल साल 2008 में जब कांग्रेस बहुमत के जादुई आंकड़े से 5 सीट दूर रह गई थी और मुख्यमंत्री के तौर पर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी का नाम आगे चल रहा था, तब भी अंत में पार्टी ने गहलोत पर ही भरोसा जताया था। हालांकि इस बार पार्टी आलाकमान को सामने निर्णय में थोड़ी कठिनाई हुई। क्योंकि 2008 के चुनाव में जोशी एक वोट से हार गए थे। इस बार प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट विधानसभा का चुनाव जीते हैं।
माली समाज से आते हैं गहलोत
राजस्थान की राजनीति में जातीय वर्चस्व को तोड़ते हुए शीर्ष पर पहुंचने वाले नेताओं में यदि किसी का नाम सबसे आगे आएगा है तो वो अशोक गहलोत हैं। सूबे के दो बार मुख्यमंत्री रहे गहलोत का परिवार माली समाज से आता है। इनका परिवार किसी जमाने में जादूगरी का करतब दिखाता था। गुजरात के प्रभारी के तौर पर उन्होंने वहां की युवा तिकड़ी हार्दिक-अल्पेश-जिग्नेश को कांग्रेस के साथ खड़ाकर पार्टी को जीत की दहलीज पर ला खड़ा किया। जिसके बाद बतौर संगठन महासचिव गहलोत पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में अध्यक्ष राहुल गांधी के दायां हाथ के तौर पर उभरे। अशोक गहलोत को 70 के दशक में कांग्रेस में शामिल होने का मौका मिला था, जब पू्र्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय पार्टी में संजय गांधी की चलती थी। जब संजय गांधी के करीबियों ने उन्हें अशोक गहलोत के बारे में बताया तो उन्होंने गहलोत को राजस्थान में पार्टी के छात्र संगठन एनएसयूआई का अध्यक्ष बनाया। गहलोत को शुरुआती दिनों में संजय गांधी की मंडली के लोग गिली-बिली कहकर संबोधित करते थे। राजीव से गहलोत की नजदीकी ने सोनिया गांधी और उसके बाद राहुल गांधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस में उनकी भूमिका कम नहीं होने दी। 1998 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार हुई और भैरोसिंह शेखावत के बाद अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया गया।

क्यों चुने गये गहलाेत
भले ही राजस्थान में मृतप्राय पड़ी पार्टी में जान फूंकने में पायलट सफल रहे हों लेकिन राजस्थान की जनता के सामने अभी उन्हें खुद को साबित करना बाकी है। राज्य की पिछड़ी जातियों में गहलोत सर्वमान्य नेता हैं। अशोक गहलोत जिस समुदाय का नेतृत्व करते हैं वो शांत माना जाता है और पिछड़ी जातियां उनके नेतृत्व में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। यही वजह रही कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अंत में पायलट की जगह गहलोत को चुना।

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