सवर्ण आरक्षण राज्य सभा में भी हुआ पास

नयी दिल्ली : नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का संविधान संशोधन बिल राज्यसभा में पारित हो गया है। बिल के पक्ष में 165 वोट और विपक्ष में 7 वोट पड़े। राज्य सभा में करीब दस घंटे बिल पर चर्चा हुई। अब इस पर राष्ट्रपति की हस्ताक्षर का इंतजार है। राज्यसभा में पास होने के बाद बिल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति उसे मंजूरी देंगे, जिसके बाद ये बिल कानून बन जाएगा। मालूम हो कि इससे पहले बिल मंगलवार को लोकसभा में पारित हो चुका है। राज्यसभा में विपक्ष समेत लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाए जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका भी जताई। हालांकि सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिए लाया गया है। मालूम हो कि इससे पहले लोकसभा में संशोधित बिल के समर्थन में जहां 323 वोट पड़े वहीं, विरोध में महज 3 वोट पड़े। इस विधेयक को लेकर लोकसभा में मंगलवार को करीब 5 घंटे तक चली बहस में लगभग 17 दलों ने इसका पक्ष लिया, लेकिन किसी ने भी इसका खुलकर विरोध नहीं किया। हालांकि कई सांसदों ने इस विधेयक को लेकर सरकार की नीयत पर प्रश्न जरूर भी खड़े किए। कांग्रेस, बसपा, सपा, तेदेपा और द्रमुक सहित विभिन्न पार्टियों ने इसे भाजपा का चुनावी स्टंट करार दिया। कांग्रेस ने कहा कि वह आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए विधेयक के समर्थन में है, लेकिन उसे सरकार की मंशा पर शक है। पार्टी ने कहा कि सरकार का यह कदम महज एक चुनावी जुमला है और इसका मकसद आगामी चुनावों में फायदा हासिल करना है।

केंद्र के साथ राज्य सरकार और कॉलेजों में भी आरक्षण लागू होगा
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में बहस के दौरान कहा कि यह आरक्षण सिर्फ केंद्र सरकार की नौकरियों या केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होने के साथ यह राज्य सरकारों की नौकरियों और कॉलेजों पर भी लागू होगा। रविशंकर ने विपक्ष से कहा- आप विधेयक में 8 लाख की आय सीमा पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन बिल में प्रावधान है कि राज्य अपनी मर्जी से जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का पैमाना तय कर सकेंगे। उदाहरण के लिए किसी राज्य को लगता है कि आमदनी का पैमाना 8 लाख रुपए नहीं 5 लाख रुपए होना चाहिए तो वह ऐसा कर सकेगा। संवैधानिक संशोधन के जरिए राज्यों को यह निर्णय करने का अधिकार रहेगा। रविशंकर ने बिल देरी से लाने के आरोपों पर कहा कि क्रिकेट में छक्का स्लॉग ओवरों में लगता है और यह पहला छक्का नहीं है अभी विकास और बदलाव के लिए अन्य छक्के भी आने वाले हैं। पहले कांग्रेस ने क्यों अगड़ी जातियों को आरक्षण नहीं दिया, अब हम दे रहे हैं तो आप सवाल उठा रहे हैं।

आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए कोई सीमा नहीं है
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सभी सदस्यों ने इस बिल का समर्थन किया है लेकिन कुछ न कुछ लेकिन लगा दिया है। प्रसाद ने कहा कि संविधान के बुनियाद ढांचे को नहीं बदला गया है और उसमें आरक्षण और किसी तरह की सीमा का जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि जातिगत आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी की सीमा तय की है आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए कोई सीमा नहीं है। मौजूदा एसी-एसटी और ओबीसी आरक्षण में किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, वो जस का तस रहेगा। मंत्री ने कहा कि संविधान में आर्थिक तौर पर कमजोर अगड़ी जातियों को आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

मंत्री बताएं कि आबादी के हिसाब से पिछड़ों का आरक्षण कब से बढ़ा रहे : सतीश मिश्रा
बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि हमारी नेता बहम मायावती सदन के भीतर उच्च जातियों के गरीबों को आरक्षण का समर्थन कर चुकीं हैं। हमारी पार्टी भी आज इस बिल का समर्थन कर रही है। मिश्रा ने कहा कि अगर आप संविधान में आर्थिक आरक्षण के लिए संशोधन ला रहे हैं तो जातिगत आरक्षण के लिए भी 50 फीसदी से ऊपर आरक्षण लेकर आइए। उन्होंने कहा कि आप क्यों, कैसे और किन परिस्थितियों में बिल ला रहे हैं, इस पर तो सवाल पूछे ही जाएंगे। सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण के लिए 4 साल में क्या किया है। मंत्री बताएं कि आबादी के हिसाब से पिछड़ों का आरक्षण कब से बढ़ा रहे हैं।

8 लाख कमाने वाला गरीब है, तो इनकम टैक्स लिमिट को भी 8 लाख करें : सिब्बल
कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि जितनी नौकरियां पैदा नहीं हुई उससे कई ज्यादा नौकरियां चली गईं हैं। निजी और सार्वजनिक दोनों ही क्षेत्र में नौकरियों की संख्या घटी है। देश का युवा आज नौकरी के लिए तरस रहा है और वो मौके उसे सिर्फ देश का विकास होने पर मिलेंगे। सिब्बल ने कहा ‌कि एक तरफ 2.5 लाख कमाने वाले को इनकम टैक्स देना पड़ता है और दूसरी तरफ आप 8 लाख कमाने वाले को गरीब बता रहे हैं। आप इनकम टैक्स लिमिट को भी 8 लाख कर दीजिए।

मनोज झा ने इस आरक्षण को जातिगत आरक्षण खत्म करने का रास्ता बताया
आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि कैबिनेट से लेकर आखिरी पायदान तक जाति का असर पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर आप सुप्रीम कोर्ट की सीमा तोड़ रहे हैं तो ओबीसी को भी बढ़ाकर आरक्षण दीजिए। झा ने कहा कि इस बिल के जरिए जातिगत आरक्षण को खत्म करने का रास्ता तय हो रहा है। उन्होंने कहा कि कानूनी और संवैधानिक तौर पर यह बिल खारिज होता है। झा ने झुनझुना दिखाते हुए कहा कि आमतौर पर ये बजता है लेकिन इस दौर में यह सरकार के पास है जो सिर्फ हिलता है बजता नहीं है।

सरकार का लक्ष्य गरीब सामान्य वर्ग नहीं 2019 का चुनाव है : रामगोपाल यादव
समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि सरकार यह बिल कभी भी ला सकती थी, लेकिन सरकार का लक्ष्य आर्थिक रूप से गरीब सामान्य वर्ग नहीं बल्कि 2019 का चुनाव है। अगर इनकी दिल में ईमानदारी होती तो 3-4 साल पहले यह बिल आ जाता। यादव ने कहा कि यह बिल सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ के खिलाफ है और कोर्ट इसे अपहोल्ड भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि नौकरियां हैं नहीं ऐसे में कुछ बाद आरक्षण की बात भी बेमानी हो जाएगी। यादव ने कहा कि सरकार को निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि सरकार क्षेत्र में ठेके पर काम हो रहा है, नौकरियां लगातार घट रही हैं।

यह है सरकार का फैसला
मोदी कैबिनेट ने सोमवार को सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया। इसके तहत जिन लोगों को अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं मिलता था यानी जो अनारक्षित श्रेणी में आते थे उन लोगों को इस फैसले से सरकारी नौकरी और शैक्षणिक क्षेत्र में लाभ मिलेगा। मतलब, आरक्षण का फायदा उन सवर्णों को मिलेगा, जिसकी सलाना इनकम 8 लाख रुपए या इससे कम है या जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती की जमीन है। इसके अलावा जिसके पास 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान है, वो भी लाभ के दायरे में आएंगे। कस्बों में 200 गज जमीन वालों को, शहरों में 100 गज जमीन वालों को भी इसका लाभ मिलेगा। इस श्रेणी में ब्राह्मण, ठाकुर, कायस्थ, राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को आरक्षण मिलेगा। इसके लिए संविधान के अनुच्‍छेद 15 और 16 में संशोधन होगा।

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