रामदेव ने राहुल को सराहा, प्रधानमंत्री पर अप्रत्यक्ष रुप से साधा निशाना

नईदिल्लीः संसद में दिए गए राहुल के बयान और उनकी क्रियाकलाप को लेकर हर जगह चर्चाएं चल रही है। इसी चर्चा मे योग गुरू बाबा रामदेव भी कूद पड़े है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राहुल गांधी की झप्पी देने की तारीफ करते हुए एक दूसरी हवा दे दी। खैर, रामदेव को भी राहुल की झप्पी अच्छी लगी। रामदेव ने कहा, राजनीति में परस्पर बैर नहीं होना चाहिए बल्कि मुद्दों पर आधारित विरोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये अच्छी शुरुआत हुई है। बैर मन में ना हो। जो विरोध हो वह मुद्दा आधारित हो। योग गुरु ने कहा कि संसद में मुद्दों पर आधारित बहस हुई। सभी ने अपने बुनियादी अधिकारों का उपयोग किया। ये अलग बात है कि विपक्ष पर सत्ता पक्ष भारी रहा क्योंकि उनका संख्या बल भारी है।
अग्निवेश के विचारों से असहमत, लेकिन हमले का किया निंदा
एक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होने रायपुर पहुंचे रामदेव ने ‘आजतक’ से कहा, संसद में बड़ी सार्थक बहस हुई है, और जब बहस मुद्दों पर आधारित होती है तो उसका महत्व बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरीके से मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। यह एक सोशल जस्टिस की बात है। रामदेव ने स्वामी अग्निवेश पर हुए हमले की निंदा। उन्होंने कहा कि स्वामी अग्निवेश के साथ जो कुछ हुआ वह गलत था, उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए था। हालांकि वे भी स्वामी अग्निवेश के कई विचारों से असहमत हैं।
रामदेव ने अप्रत्यक्ष रूप से मोदी पर साधा निशाना
बाबा रामदेव ने बेरोजगारी को देश का सबसे बड़ा मुद्दा करार दिया। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में वे खुद सर्वाधिक रोजगार पैदा कर रहे हैं। कहा कि महंगाई और गरीबी भारत माता के माथे पर कलंक है। इसे मिटाने के लिए और ज्यादा सार्थक कदम उठाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि साधु बेरोजगार होता है, और उनके जैसा फकीर जब लाखों लोगों को रोजगार देता है तो वजीर और वजीर-ए-आलम को और ज्यादा देना ही चाहिए।
राहुल की जादू की झप्पी काम ना आई
गौरतलब है कि राहुल ने मोदी की कड़ी आलोचना करने के बाद अप्रत्याशित रूप से उनकी सीट पर जाकर च्जादू की झप्पी दी, जिस पर सदन भौंचक्क रह गया और फिर ठहाकों से गूंज उठा। सदन में सरकार को खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए गांधी ने प्रधानमंत्री पर तीखे हमले करते हुए कई आरोप लगाए। अपनी बात खत्म करके वह प्रधानमंत्री की सीट के पास गए और उनसे गले लगने के लिए उठने का संकेत किया। मोदी ने बैठे-बैठे ही उनसे हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन गांधी ने हाथ मिलाने के बजाय गले लगने का इशारा किया।

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