बच्चों की सुरक्षा में चूक पर स्कूल मैनेजमेंट भुगतेगा खामियाजा

(भावना सिंघल)
नयी दिल्लीः स्कूल में बच्चों की सुरक्षा में चूक होने पर स्कूल मैनेजमेंट पर जुर्माना लगाया जा सकता है। वहां एडमिशन पर रोक लगाने के साथ उसकी मान्यता भी रद्द हो सकती है। गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में एक बच्चे की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मानव संसाधन मंत्रालय को स्कूल मैनेजमेंट की जिम्मेदारी तय करने को कहा था। राष्ट्रीय बाल आयोग के साथ मिलकर मंत्रालय ने स्कूल मैनेजमेंट की जवाबदेही तय करने के लिए गाइडलाइन तैयार की।
गाइडलाइन के अनुसार प्राइवेट स्कूल में पैरेंट्स-टीचर एसोसिएशन (पीटीए) स्कूल सेफ्टी प्लान तैयार करेगा। सेफ्टी मैनुअल ठीक प्रकार से लागू नहीं होने पर इसकी शिकायत पहले बीईओ से की जाएगी। वहां से समाधान नहीं होने पर डीईओ और उसके बाद डीएम से शिकायत की जा सकती है। डीएम स्कूल पर जुर्माना लगा सकते हैं। सरकारी स्कूलों के मामले में स्कूल मैनेजमेंट कमिटी स्थानीय प्राधिकारों से इसकी शिकायत करेगी। स्कूल के वक्त में कोई एक्सिडेंट या स्कूल की किसी लापरवाही की शिकायत पुलिस में की जाएगी। आरटीई में प्राइवेट स्कूलों को स्कूल मैनेजमेंट कमिटी (एसएमसी) नहीं बनाने की छूट है। इसलिए गाइडलाइन में प्राइवेट स्कूलों में पीटीए बनाना जरूरी होने का जिक्र किया गया है। पीटीए में हर क्लास के हर सेक्शन से एक पैरेंट प्रतिनिधि होना अनिवार्य है। कुल सदस्यों में तीन-चौथाई सदस्य पैरेंट्स होंगे। कमजोर वर्ग के बच्चों के पैरेंट्स का भी प्रतिनिधित्व होने का जिक्र है। पीटीए में 50 प्रतिशत शिक्षक स्कूल मैनेजमेंट नॉमिनेट करेंगे और 50 प्रतिशत पैरेंट्स प्रतिनिधि। एक सदस्य लोकल अथॉरिटी और एक स्कूल मैनेजमेंट का होगा। एकेडमिक सेशन शुरू होने के एक महीने के भीतर पीटीए का गठन जरूरी होगा।

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