प्रधानमंत्री मोदी ने अक्षय कुमार के साथ साक्षात्कार में बताये जिंदगी के राज

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने लोकसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक गैर चुनावी साक्षात्कार लिया जिसमें मोदी ने अपने जिंदगी के कई अनजाने पहलुओं से पर्दा उठाया। यह साक्षात्कार नई दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर लिया गया। अक्षय ने मोदी से उनके खाने के तरीके से लेकर सोने तक और सन्यासी जीवन से लेकर राजनीति में आने तक के बारे में कई सवाल किये, जिसका उन्होंने बड़ी सहजता से उत्तर दिया। बता दें कि प्रधानमंत्री के साक्षात्कार से पहले अक्षय ने सोमवार को ट्वीट किया था कि वे अनजान और अपरिचित क्षेत्र में कदम रखने वाले हैं। वहीं मंगलवार को उन्होंने इसका खुलासा करते हुये ट्वीट में लिखा, “जब पूरा देश चुनाव और राजनीति पर बातें कर रहा है, यह एक राहत देने वाला साक्षात्कार है। अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेलाग बातचीत पूरी तरह से गैर राजनीतिक और स्पष्ट होगी।” आइए इस साक्षात्कार के माध्यम से जानते हैं प्रधानमंत्री के बारे में कुछ रोचक बातें-

बोलूंगा तो चुनाव में नुकसान भी हो सकता है

अक्षय ने प्रधानमंत्री से सवाल-जवाब का दौर शुरु करते हुये जब विपक्षी नेताओं से उनके रिश्ते के बारे में पूछा तो मोदी ने कहा “मैं बोलूंगा तो चुनाव में नुकसान भी हो सकता है लेकिन आपको बताऊं की ममता दीदी मुझे खुद पसंद करके कुर्ते और बंगाली मिठाई भी भेजती हैं।”

अब मुझे कंट्रोल करना पड़ता है

राजनीति से परे अक्षय ने एक अजीब सा सवाल किया। उन्होंने कहा कि जब मैंने अपने ड्राइवर की बेटी से पूछा की मोदी जी मिलें तो क्या सवाल करोगी? तो उसने कहा- क्या हमारे प्रधानमंत्री आम खाते हैं? खाते हैं तो कैसे, काटकर या गुठली के साथ? इस सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा “आम खाता हूं। यह मुझे पसंद भी है। गुजरात में आम रस की परंपरा है। छोटा था तो आम-वाम खरीदना, उस तरह की हमारी फैमिली लक्जरी तो थी नहीं। बचपन में पेड़ से पके आम तोड़कर खाना पसंद था। बाद में आम रस खाने की आदत लगी। लेकिन अब मुझे कंट्रोल करना पड़ता है कि खाऊं या नहीं।”

आश्चर्य हो रहा है कि देश मुझे इतना प्यार क्यों दे रहा है

जब अक्षय ने उनसे पूछा कि आपको प्रधानमंत्री बनने का विचार कब आया ? तो उन्होंने कहा कि “मैंने कभी नहीं सोचा था कि पीएम बनूंगा। जो मेरा फैमिली बैकग्राउंड है उसमें मुझे कोई अच्छी सी नौकरी भी मिल जाती तो मां पड़ोसियों को गुड़ खिला देती। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि देश मुझे इतना प्यार क्यों दे रहा है।” वहीं सन्यासी या सेना में जाने की चाह के बारे में पूछे जाने पर मोदी ने कहा कि “1962 की जंग हुई। स्टेशन पर देखा जो लोग फौज में जा रहे थे, उनका काफी सम्मान होता था। मैं भी वहां चला जाता था। तब मन में आया कि यह देश के लिए कुछ करने का माध्यम है।”

लोगों से सीखता भी हूं और सिखाता भी हूं

प्रधानमंत्री मोदी से जब अक्षय ने उनके गुस्से के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बड़ी सहजता से कहा “राजी-नाराजगी यह स्वभाव के हिस्से हैं। हर प्रकार की चीज सब में होती है। आपके स्वभाव में ईश्वर ने दिया है आपको तय करना है। मैं इतने दिन तक मुख्यमंत्री रहा, इतने दिन प्रधानमंत्री रहा, किसी चपरासी से लेकर चीफ सेक्रेटरी तक पर गुस्सा करने का अवसर नहीं मिला।” उन्होंने कहा कि “कोई मेरे लिए कुछ लाया तो मैं तो खुद हेल्पिंग हैंड के रूप में खड़ा हो जाता हूं। मैं लोगों से सीखता भी हूं और सिखाता भी हूं। मेरे अंदर गुस्सा होता होगा, लेकिन मैं व्यक्त करने से खुद को रोक लेता हूं।”

बहुत छोटी उम्र में वह सब छोड़ दिया

मोदी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि “मैं पीएम बनकर घर से निकला होता तो लगता कि सब मेरे साथ रहें। लेकिन मैंने बहुत छोटी उम्र में वह सब छोड़ दिया। मैं घर छोड़कर निकल गया तो मेरी ट्रेनिंग वैसी हुई। लेकिन फिर भी मैंने मां को बुला लिया था। कुछ दिन उनके साथ बिताए। लेकिन मां कहती थी, क्यों अपना समय खराब करते हो। जितने दिन मां रही, मैं अपने शेड्यूल में ही लगा रहता था। रात को 12 बजे आता तो मां को दुख होता कि ये क्या कर रहा है।”

इधर-उधर की बात में वक्त बर्बाद नहीं करता

अक्षय ने जब उनसे पूछा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी आपका वैसा ही ह्यूमर है? जैसा कि मुख्यमंत्री के तौर पर था? तो मोदी ने कहा कि “मेरी यह छवि गलत तरीके से पेश की गई है। ऑफिस जाता हूं, तो खुद काम करता हूं तो दूसरों को भी लगता है कि ये करते हैं तो हमें भी करना चाहिए। कई बार रात 11 बजे फोन करके पूछता हूं कि फलां काम हुआ कि नहीं। मैं काम के वक्त काम करता हूं। इधर-उधर की बात में वक्त बर्बाद नहीं करता।” उन्होंने कहा कि “मेरी मीटिंग में कोई मोबाइल इस्तेमाल नहीं करता। मेरा फोन भी नहीं आता। जहां तक ह्यूमर का सवाल है। मेरे परिवार में पिताजी कभी नाराज हों तो मैं एक-दो मिनट में ही माहौल को हल्का कर देता था।”

साक्षात्कार के बीच चुटकुला भी सुनाया

साक्षात्कार के बीच जब अक्षय ने एक चुटकुला सुनाते हुये पूछा, सुना है गुजराती पैसों के लिए बहुत सही रहते हैं‍‍‍‍‍‍‍‍? तो प्रधानमंत्री ने यह चुटकुला सुनाया,”एक बार ट्रेन में ऊपर की बर्थ पर कोई पैसेंजर सोया था। स्टेशन आया तो खिड़की से बाहर झांककर जाते हुए व्यक्ति से पूछा- कौन सा स्टेशन आया? उसने कहा चार आना दोगे तो बताऊंगा। इस पर यात्री ने कहा- रहने दे, अहमदाबाद आया होगा।”

बच्चों को मेहनत करना सिखाएं

साढ़े तीन घंटे ही सोने को लेकर पूछे गये सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि “अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी मुझसे मिले तो यही कहा- आप ऐसा क्यों करते हैं? लेकिन मैं कहता हूं कि कम समय में भी मेरी नींद पूरी हो जाती है। मोदी ने अक्षय द्वारा पूछे गये सवाल अगर आपको अलादीन का चिराग मिल जाए तो क्या करेंगे? पर कहा कि “मैं तो मांगूंगा कि जितने भी समाजशास्त्री हैं उनके दिमाग में भर दे कि वे बच्चों को अलादीन वाली कहानी सुनाना बंद कर दें। बच्चों को मेहनत करना सिखाएं।”

बता दें कि सीएम से पीएम बनने पर सबसे कीमती चीज घर लाने के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि “शायद इससे पहले दूसरे प्रधानमंत्रियों को यह लाभ नहीं मिला जो मुझे मिला। वह यह है कि मैं लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनकर आया।” उन्होंने कहा कि “मैं गुजरात का सबसे लंबा समय तक रहा मुख्यमंत्री था। यह तजुर्बा शायद किसी को नहीं मिला। देवेगौड़ा साहब मुख्यमंत्री रहे थे, लेकिन कम समय के लिए। मैं मान सकता हूं कि यह चीज मैं वहां से लेकर आया जो देश के काम आ रही है।”

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