देशभर के चुनाव नतीजे, मोदी लहर में कांग्रेस का सूपड़ा साफ

नई दिल्ली  :  इस बार के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 300 सीटों पर ऐतहासिक जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया है। हालांकि कांग्रेस 50 सीटों का आंकड़ा पार करने में सफल रही जो पिछले आम चुनाव के मुकाबले अधिक है। वहीं पूरा विपक्ष मोदी की सुनामी में चारों खाने चित हो गया है। विपक्ष और अन्य की सीटें मिला दें तो भी यह 200 के आंकड़े के आस-पास भी नहीं पहुंचता है।

हावी रहा राष्ट्रवाद का मुद्दा

17वीं लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राष्ट्रवाद का मुद्दा हावी रहा जिसका सीधा फायदा भाजपा और राजग गठबंधन को मिला। हालांकि भाजपा अपने सहयोगी दलों के बिना भी पूर्ण बहुमत के आंकड़े से कहीं आगे निकल गई है। वहीं कांग्रेस की न्याय योजना वोटरों को प्रभावित नहीं कर सकी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सत्ता में बैठी मोदी सरकार लगातार आतंकवाद के खिलाफ कड़े फैसले ले रही थी और विपक्ष सरकार से बालाकोट की कार्रवाई के सबूत मांग रहा था। जैश-ए-मोहम्मद सरगना को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने की सरकार की कोशिशों ने मतदाताओं को खासा प्रभावित किया। इन्हीं वजहों से मोदी एकबार फिर सत्ता पर काबिज होने में सफल रहे। बात करें राज्यों में भाजपा के प्रदर्शन की तो उसने गुजरात, दिल्ली, चंडीगढ़, त्रिपुरा, अरुणाचल, उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा में क्लीन स्वीप किया है। यहां किसी दूसरी पार्टी या अन्य खाता भी नहीं खोल पाए। वहीं राजस्थान में 26 में से 25 सीटों पर जीत हासिल की है।

8 राज्यों में भाजपा + का क्लीन स्वीप, यहां 57 सीटें

इन राज्यों के नतीजे पर एक नजर- भाजपा+ 57, कांग्रेस+ 00

ऐसे समझें : राष्ट्रवाद की लहर और मोदी की सुनामी में इन राज्यों में देखने को मिली जहां  कांग्रेस+ और अन्य का खाता भी नहीं खुल सका। यहां भी राष्ट्रवाद के मुद्दे ने 22 विपक्षी दलों के मोदी हटाओ के नारे और कांग्रेस की न्याय योजना की हवा निकाल दी। इन राज्यों में भाजपा की अच्छी पकड़ पहले से ही रही है। यहां कांग्रेस सहित कोई भी दल या निर्दलीय सेंध नहीं लगा पाया।

गुजरात  – यहां कुल 26 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

चंडीगढ़  – यहां कुल 26 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

हरियाणा – यहां कुल 10 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

दिल्ली  – यहां कुल 7 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

हिमाचल  – यहां कुल 4 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

उत्तराखंड  – यहां कुल 5 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

चंडीगढ़  – यहां कुल 1 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

अरुणाचल – यहां कुल 2 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

त्रिपुरा  – यहां कुल 2 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें सभी सीटें भाजपा + के हिस्से में आईं। कांग्रेस + और अन्य का खाता भी नहीं खोल पाए।

इन 9 राज्यों में गैर भाजपा-कांग्रेस दलों की सरकारें, यहां 178 लोकसभा सीटें

पश्चिम बंगाल के नतीजों पर थी सबकी निगाहें

चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल पर देश भर की नजरें टिकी थी। मतदान के मामले में बंगाल सबसे आगे रहा लेकिन यहीं सबसे ज्यादा हिंसा भी हुई इसके बावजूद भाजपा यहां तृणमूल के किले में सेंध लगाकर 18 सीटें पाने में कामयाब रही। पिछले चुनाव में राज्य में भाजपा को सिर्फ 2 सीटें मिली थीं। पश्चिम बंगाल में भी भाजपा ने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर जमकर प्रचार किया।

ऐसे समझें :अन्य दलों की सरकारों वाले राज्यों में कांग्रेस की न्याय योजना का अच्छा असर देखने को मिल रहा है। इन राज्यों में कांग्रेस+ पिछली बार के मुकाबले 40 सीटें ज्यादा लाई। 2014 में कांग्रेस+ के हिस्से महज 18 सीटें आईं थीं। इस बार यह आंकड़ा 58 पहुंच गया। वहीं भाजपा+ भी इन राज्यों में 2014 के मुकाबले 8 सीटों का फायदा हुआ है।

इन राज्यों के नतीजे पर एक नजर- भाजपा+  42, कांग्रेस+ 58, अन्य 78
पश्चिम बंगाल – यहां कुल 42 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा +  के हिस्से में कुल 18 सीटें आईं। कांग्रेस + को  1 व अन्य के खाते में 23 सीटें गईं।

तमिलनाडु  – यहां कुल 39 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा +  के हिस्से में 2 सीटें आईं। कांग्रेस + को 32 व अन्य के खाते में 5 सीटें गईं।

आंध्र प्रदेश  – यहां कुल 25 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा +  के हिस्से में 0 सीटें आईं। कांग्रेस + को 0 व अन्य के खाते में 25 सीटें गईं।
तेलंगाना  – यहां कुल 17 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा +  के हिस्से में 4 सीटें आईं। कांग्रेस + को 4 व अन्य के खाते में 9 सीटें गईं।

ओडिशा – यहां कुल 21 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा +  के हिस्से में 8 सीटें आईं। कांग्रेस + को 0 व अन्य के खाते में 13 सीटें गईं।
केरल  – यहां कुल 20 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा +  के हिस्से में 0 सीटें आईं। कांग्रेस + को 19 व अन्य के खाते में 1 सीटें गईं।
दिल्ली  – यहां कुल 7 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा + के हिस्से में 7 सीटें आईं। कांग्रेस + को 0 व अन्य के खाते में 0 सीटें गईं।
जम्मू-कश्मीर  – यहां कुल 6 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा + के हिस्से में 3 सीटें आईं। कांग्रेस + को 2 व अन्य के खाते में 1 सीटें गईं।
सिक्किम  – यहां कुल 1 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें से भाजपा + के हिस्से में 0 सीटें आईं। कांग्रेस + को 0 व अन्य के खाते में 1 सीटें गईं।
कुल – 178 सीटों  में से  भाजपा + के हिस्से में 42 सीटें आईं। कांग्रेस + को 58 व अन्य के खाते में 78 सीटें गईं।

भाजपा शासित 16 राज्यों में भी मोदी लहर का असर, यहां 253 संसदीय सीटें

इन राज्यों के नतीजे पर एक नजर- भाजपा+ : 216, कांग्रेस+ : 15

बता दें कि जिन 16 राज्यों में भाजपा+ की सरकार है वहां की 253 लोकसभा सीटों पर भी सत्ताधारी दल का कब्जा बरकरार रहा। यहां भी मोदी लहर और राष्ट्रवाद के लहर से भाजपा आैर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार वाले राज्य भी अछूते नहीं रहे। इन राज्यों की 253 लोकसभा सीटें में से 216 सीटें भाजपा+ के खाते में गईं जो कि पिछली बार की 212 सीटें से 4 ज्यादा हैं। उधर, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) को 11 सीटों का नुकसान हुआ है। इन राज्यों में पिछली बार  के हिस्से इन राज्यों की 26 सीटें आईं थीं। इस बार यह आंकड़ा महज 15 पर सिमट गया।

कांग्रेस शासित 6 राज्यों में आई राष्ट्रवाद की सुनामी, यहां 107 लोकसभा सीटें
इन राज्यों के नतीजे पर एक नजर- भाजपा : 92, कांग्रेस : 14

गौरतलब है कि कांग्रेस शासित राज्यों में भी राष्ट्रवाद की सुनामी ने न्याय योजना को बेअसर साबित किया। इन राज्यों की 107 सीटों में से कांग्रेस और उसके सहयोगियी दलों के हिस्से में सिर्फ 14 सीटें आईं। पिछले लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा 16 था। 2014 आम चुनाव में इन राज्यों में भाजपा+ को 86 सीटें मिलीं थीं। भाजपा को इस बार 6 सीटों का फायदा हुआ है।

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