आजादी के बाद इतना बढ़ गया प्रति वोटर चुनाव का खर्च

नई दिल्लीः भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र देश है। सामान्तयः इसके खर्चे अन्य देशों के मुकाबले काफी अधिक है। लेकिन अब पहले चुनाव से लेकर सत्रहवीं लोकसभा तक प्रति वोटर खर्च में नौ हजार प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में प्रति वोटर साठ पैसा खर्चा हुआ था और आज सत्रहवीं लोकसभा के समय 55 रुपए पर पहुंच गया है। भारतीय लॉ कमीशन ने बढ़ते चुनावी खर्च का हवाला देंते हुए चुनाव आयोग से देश में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की थी।
आइए नजर ड़ालते है चुनावी खर्च के सफर पर
आजादी के बाद और संविधान के निर्माण होकर लागू होने के बाद देश में पहला आम चुनाव वर्ष 1952 में हुआ था। इस चुनाव में सब कुछ शुरुआत से होना था। पहले चुनाव में बैलेट पेपर से लेकर चुनावी तैयारियों के लिए कुल 10.45 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था। इसके बाद 1957 में हुए दूसरे चुनाव का बजट लगभग आधा हो गया और यही एकमात्र ऐसा चुनाव था जिसका चुनावी बजट कम था लेकिन उसके बाद चुनावी बजट में लगातार बढ़ोतरी होती गई। चुनावी बजट के बढ़ोत्तरी के मामले में एक आकंड़े में बताया गया कि 1971 में चुनाव का खर्च 11.61 करोड़ रुपए था जो 1977 में दोगुना बढ़कर 23.03 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
प्रति वोटर खर्च का दायरा बढ़ा
अब आप अंदाजा लगा सकते है कि चुनावी बजट और वोटर्स की संख्या के आधार पर प्रति वोटर पर होने वाला खर्च 1977 में प्रति वोटर 71 पैसे था वहीं 1980 में यह 1.5 रुपए प्रति वोटर पर पहुंच गया। अनुमान है कि सत्रहवें लोकसभा 2019 में यह खर्चा 5 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है। यानी 90 करोड़ वोटर्स के हिसाब से देखें तो प्रति वोटर खर्च में 9067 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
गौरतलब है कि खर्चों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी पंद्रहवी लोकसभा के बाद शुरू हुआ। 2009 में होने वाले चुनाव में प्रति वोटर पर खर्च 12 रुपए था वहीं सोलहवीं लोकसभा 2014 में यह खर्च 241 प्रतिशत बढ़ते हुए 41 रुपए पर पहुंच गया।
केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती है खर्चा
लोकसभा पर होने वाले खर्चों को केंद्र सरकार वहन करती है जबकि विधान सभा के चुनावी खर्चों को राज्य सरकार चुकाती है। अगर लोकसभा के साथ ही राज्यों के विधान सभा चुनाव होते हैं तो केंद्र और राज्य दोनों बराबर रूप से चुनाव पर हुए खर्चों को वहन करते हैं। चुनावी खर्चों में स्याही और अमोनिया पेपर से लेकर वोटिंग मशीन,चुनाव से संबंधित अन्य उपकरण और उन्हें बूथ तक ले जाने के साथ मतगणना में लगे कर्मचारियों का दैनिक भत्ता तक शामिल होता है।

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