कोलकाता में जन्मे जस्‍टिस पिनाकी घोष बने भारत के पहले लोकपाल

नई दिल्‍लीः सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष आधिकारिक रूप से भारत के पहले लोकपाल बन गए हैं। जस्टिस पिनाकी घोष ने शनिवार को देश के पहले लोकपाल की शपथ ग्रहण की। राष्‍ट्रपति भवन में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिनाकी घोष को संविधान की रक्षा की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के औपचारिक समारोह के दौरान उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई भी मौजूद थे।

जानें कौन हैं जस्टिस पिनाकी

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पिनाकी घोष को मानवाधिकार मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। जस्टिस घोष को मानवाधिकार कानूनों पर उनकी बेहतरीन समझ और विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। जस्टिस घोष उच्चतम न्यायालय के जज रह चुके हैं। वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे हैं। वह अपने दिए गए फैसलों में मानवाधिकारों की रक्षा की बात बार-बार करते थे। वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं। सुप्रीम कोर्ट से पहले वह पूर्व में कलकत्ता हाई कोर्ट के जज रह चुके हैं और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भी चुके हैं। पिनाकी चंद्र घोष का जन्म कोलकाता में हुआ। वह कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस दिवंगत जस्टिस शंभू चंद्र घोष के बेटे हैं।

ज‌स्टिस पिनाकी के साथ 8 अन्य सदस्य भी शामिल

आधिकारिक आदेश के मुताबिक, सशस्त्र सीमाबल (एसएसबी) की पूर्व प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, महेंद्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम को लोकपाल के गैर न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं जस्टिस दिलीप बी भोंसले, प्रदीप कुमार मोहंती, अभिलाषा कुमारी और अजय कुमार त्रिपाठी को लोकपाल के न्यायिक सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया है।

कौन-कौन होंगे इसके दायरे में

प्रधानमंत्री के खिलाफ भी जांच हो सकती है। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें भी हैं। प्रधानमंत्री के खिलाफ यदि आरोप अंतरराष्ट्रीय संबंध, बाहरी और आंतरिक सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से संबंधित होंगे तो एक्ट लोकपाल जांच की अनुमति नहीं देता है। प्रधानमंत्री के खिलाफ शिकायतों की जांच तब तक नहीं हो सकती है तब तक लोकपाल की पूर्ण पीठ जांच शुरू करने पर विचार नहीं करती है और कम से कम दो तिहाई सदस्य इसे स्वीकृति नहीं प्रदान कर देते हैं।

जन लोकपाल बिल के मुख्य बिन्दु

-यह संस्था निर्वाचन आयोग और उच्चतम न्यायालय की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी।

-किसी भी मुकदमे की जांच 3 महिने के भीतर पूरी होगी। सुनवाई अगले 6 महिने में पूरी होगी।

-भ्रष्ट नेता, अधिकारी या न्यायाधीश को 1 साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।

-भ्रष्टाचार के कारण से सरकार को जो नुकसान हुआ है अपराध साबित होने पर उसे दोषी से वसूला जाएगा।

-अगर किसी नागरिक का काम तय समय में नहीं होता तो लोकपाल दोषी अधिकारी पर जुर्माना लगाएगा जो शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति के तौर पर मिलेगा।

-लोकपाल के सदस्यों का चयन न्यायाधीश, नागरिक और संवैधानिक संस्थाएं मिलकर करेंगी।

नेताओं का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।

-लोकपाल/ लोक आयुक्तों का काम पूरी तरह पारदर्शी होगा।

-लोकपाल के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच 2 महीने में पूरी कर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा।

-सीवीसी, विजिलेंस विभाग और सीबीआई के ऐंटि-करप्शन विभाग का लोकपाल में विलय हो जाएगा।

-लोकपाल को किसी भी भ्रष्ट जज, नेता या अफसर के खिलाफ जांच करने और मुकदमा चलाने के लिए पूरी शक्ति और व्यवस्था होगी।

जानें जस्टिस पीसी घोष के कुछ अहम फैसले

जयललिता के खिलाफ आय से अधिक सम्पति के मामले में उन्होंने शशिकला समेत बाकी आरोपियों को दोषी करार देने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। हालांकि फैसला सुनाए जाने से पहले तक जयललिता की मौत हो चुकी।

जस्टिस राधाकृष्णन के साथ वाली बेंच में रहते हुए उन्होंने जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ जैसी परपंरा को पशुओं के प्रति हिंसा मानते हुए उन पर रोक लगाई।

अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस मामले में जस्टिस रोहिंटन नरीमन के साथ बेंच में रहते हुए उन्होंने निचली अदालत को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह और बाकी नेताओ पर आपराधिक साजिश की धारा के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।

सरकारी विज्ञापनों के लिए दिशा निर्देश तय करने वाली बेंच के भी वो सदस्य थे। जस्टिस घोष, चीफ जस्टिस एच एल दत्तू और जस्टिस कलीफुल्ला के साथ उस बेंच के भी सदस्य थे, जिसने ये तय किया था कि केंद्रीय एजेंसी ( सीबीआई )की ओर से दर्ज मुकदमें में दोषी ठहराए गए राजीव गांधी के दोषियों की सजा माफी का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है।

जस्टिस घोष उस संविधान पीठ के भी सदस्य थे, जिसने अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन के फैसले को पलटते गए वहां पहली की स्थिति को बहाल किया था।

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