73 प्रतिशत भारतीय नींद ना आने की समस्या से ग्रस्त, जानिए क्या है कारण

नई दिल्लीः स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वैश्विक अग्रणी कंपनी रॉयल फिलिप्स (एनवाईएसईः पीएचजी, एईएक्सः पीएचआईए) ने आज ‘द ग्लोबल परसूट ऑफ बेटर स्लीप हेल्थ’ शीर्षक के तहत अपने वार्षिक वैश्विक नींद सर्वेक्षण के परिणाम जारी किए। नींद एवं श्वसन की देखभाल क्षेत्र की एक अग्रणी इनोवेटर के तौर पर फिलिप्स का उद्देश्य नींद को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।

फिलिप्स की ओर से केजेटी ग्रुप द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, नीदरलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के 11,006 प्रतिभागियों से बातचीत की गई और नींद के बारे में उनकी धारणाओं, नजरियों और व्यवहार को समझने की कोशिश की गई।

भारत में लोगों की नींद की स्थिति –
– 55 प्रतिशत भारतीय वयस्कों ने माना कि वे अच्छी नींद लेते हैं, लेकिन 73 प्रतिशत भारतीय वयस्क अपनी नींद की गुणवत्ता में सुधार करना चाहते हैं।
– स्लीप-हेल्थ के बारे में जागरूकता का स्तर बढ़ने की ओर इशारा करते हुए 38 प्रतिशत भारतीय वयस्कों का कहना है कि पिछले 5 वर्षों में उनकी नींद में सुधार हुआ है। यह सभी देशों का सर्वाधिक आंकड़ा है।
– हालांकि 34 प्रतिशत भारतीय वयस्कों ने नींद में सुधार के लिए उपचार एवं तकनीक जानने की इच्छा जताई, लेकिन 24 प्रतिशत लोगों का कहना था कि वे ‘स्लीप हेल्थ’ के बारे में जानकारी के लिए ऑनलाइन फोरम या सोशल मीडिया का उपयोग पहले ही कर चुके हैं।
– जहां तक नींद में सुधार की बात है तो 31 प्रतिशत भारतीय वयस्क इस ओर ध्यान देते हैं जो वैश्विक औसत 26 प्रतिशत से अधिक है।
– दिलचस्प है कि सर्वेक्षण से पता चलता है कि लोग नींद में सुधार के लिए तकनीक या वियरेबल्स का उपयोग करना चाहते हैं। करीब 16 प्रतिशत भारतीय वयस्कों ने उपकरणों के उपयोग की इच्छा जताई, क्योंकि वे वियरेबल तकनीक के जरिये आसानी से अपनी नींद की गुणवत्ता की निगरानी और उसमें सुधार कर सकते हैं।
– सर्वेक्षण के मुताबिक लगभग आधे पीड़ितों को प्राकृतिक, वंशानुगत या उम्र के कारण खर्राटे का अनुभव होता है जो इसे गंभीरता से नहीं लेने का एक प्रमुख कारण है।

हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाली नींद के लिए महत्व मुंबई (84 प्रतिशत), बेंगलूरु (88 प्रतिशत) और लखनऊ (70 प्रतिशत) के मुकाबले दिल्ली में (47 प्रतिशत) कम दिखा।

फिलिप्स इंडिया के प्रमुख (नींद एवं श्वसन देखभाल) हरीश आर ने कहा कि नतीजे बताते हैं कि भारतीय अपर्याप्त नींद को एक संभावित स्वास्थ्य समस्या मानते हैं, लेकिन उनमें नींद संबंधी बीमारियों और उपलब्ध नींद चिकित्सा समाधानों के बारे में जागरूकता अभी भी कम है। फिलिप्स में हम भारत में खासकर टियर 2 और टियर 3 बाजारों में नींद संबंधी बीमारियों के प्रति अपने जागरूकता अभियानों को मजबूती देते हुए और रोगियों को उन्नत समाधान उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसी क्रम में हाल में हमने भारत में फिलिप्स स्लीप एंड रेस्पिरेटरी केयर उत्पादों पर ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ योजना शुरू की है ताकि सस्ती एवं सुलभ देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

नई दिल्ली के न्यूरोलॉजी एंड स्लीप सेंटर के निदेशक (स्लीप मेडिसिन) एवं वरिष्ठ न्येरोलाॅजिस्ट डॉ. मनवीर भाटिया ने कहा कि नींद स्वास्थ्य का एक आवश्यक घटक है। नींद की मात्रा एवं गुणवत्ता हमारे स्वास्थ्य, सुरक्षा और उत्पादकता को प्रभावित करती है। आज के बदलते स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में नींद संबंधी बीमारियों का सफलतापूर्वक समाधान करना काफी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में नींद के निदान एवं उपचार को कहीं अधिक कुशल बनाना महत्वपूर्ण हो गया है। नींद की अधिकांश समस्याएं इलाज के योग्य हैं और कई मामलों में देखा गया है कि उपचार लेने वाले व्यक्ति की जीवन में गुणवत्ता में नाटकीय परिवर्तन आया है।

फिलिप्स भारत में ‘स्लीप-हेल्थ’ को बेहतर बनाने के लिए नींद संबंधी बीमारियों, इसके लक्षणों और स्वास्थ्य पर प्रभाव के साथ-साथ समग्र जीवन गुणवत्ता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। फिलिप्स ने देशभर में 500 से अधिक स्लीप लैब स्थापित किए हैं और 400 से अधिक स्लीप तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया है। कंपनी क्लीनिकली-प्रुवेन समाधान विकसित कर रही है जो लोगों को उनके नींद स्वास्थ्य को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह अपने स्मार्टस्लीप सूट आॅफ साॅल्यूशंस में विस्तार और दुनिया भर में 1 करोड़ से अधिक ड्रीमवियर मास्क एवं कुशन की बिक्री के जरिये उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की बढ़ती एवं उभरती जरूरतों को भी पूरा कर रही है।

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