बोधिवृक्ष की पत्तियाें और टहनियाें की डस्ट मेहमानों को भेंट कि जाएगी

बोधगयाः धार्मिक महत्ता के लिए पूरे विश्व में जाने जाना वाला बोधिवृक्ष पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा स्वस्‍थ है। पिछले साल की तुलना में इस साल इस वृक्ष की पत्तियां कम गिर रही है। वृक्ष की डालियों और पत्तियों का संतुलन बना रहा रहे और वो टूटे नहीं इसके लिए मंगलवार को बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति ने छोटी टहनियों को काटवा दिया ।

काटी गई टहनियों और पत्तों को रखा जाएगा सुरक्षित

बोधिवृक्ष की काटी गईं टहनियों और पत्तों को सुरक्षित रखा गया है। बीटीएमसी के सचिव एन दोरजे ने बताया कि सभी पत्तियों को लेमिनेट करके रखा जाएगा और कुछ टहनियों की राख बनाकर रखी जाएगी। इन्हें बाद में विशेष मेहमानों को भेंट दी जाएगी।

कटे हुए भाग पर लगाया गया विशेष पेस्ट

महाबोधि मंदिर में बोधिवृक्ष की मंगलवार को जांच की गई। वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ अमित पाण्डेय और उनकी टीम ने बताया कि बोधिवृक्ष की पत्तियों स्वस्थ हैं। एफआरआई के वैज्ञानिकों ने बोधिवृक्ष की ज्यादा बढ़ीं टहनियों के आगे के भाग को कटवाया और विशेष पेस्ट कटी हुई जगहों पर लगाया, ताकि बोधिवृक्ष अच्छी हालत में रहे। मंदिर के मुख्य पुजारी भंते चालिंदा ने बताया कि श्रद्धालुओं से बोधिवृक्ष की जड़ों के पास फूल न फेंकने की अपील की गई है। इससे जड़ों में सड़न बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

क्यों कहते है इसे बोधिवृक्ष
ऐसा माना जाता है कि ईसा से 531 साल पहले महात्मा बुद्ध को इसी वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसलिए इसे बोधिवृक्ष कहा गया। इसकी टहनियां इतनी विशाल हैं कि इसे लोहे के 12 पिलर के सहारे खड़ा किया गया है। इसके दर्शन के लिए हर साल 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गया आते हैं। इनमें से 1.5 लाख से ज्यादा विदेशी होते हैं।


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