1971 युद्ध में भारतीय महानायकों ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए

– इंदिरा गांधी की हिम्मत के सामने अमेरिकी धमकियां पड़ी फीकी

नई दिल्ली : 1971 में आज यानी 16 अगस्त को भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमेरिका की चेतावनी की परवाह किए बगैर पाकिस्तानी सेनाओं को ना केवल चारों खाने चित्त करके समर्पण के लिए मजबूर किया बल्कि पाकिस्तान को तोड़कर नया देश बांग्लादेश भी बनवा डाला। अत: आज के दिन पाकिस्तान के वो जख्म फिर हरे हो जाते हैं।

पाकिस्तानी सेना के अत्याचार के विरोध में ‘मुक्ति वाहिनी’ का गठन किया गया था जिसका मकसद बांग्लादेश की पाकिस्तान से आजादी पाना था। 1969 में पाकिस्तान के तत्कालीन सैनिक शासक जनरल अयूब के खिलाफ ‘पूर्वी पाकिस्तान’ यानी वर्तमान के बांग्लादेश में असंतोष बढ़ गया था और बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान के आंदोलन के दौरान 1970 में यह अपने चरम पर था।

महज 13 दिन में पाकिस्तान हो गया चित

3 दिसंबर को पाकिस्तान ने भारत के 11 एयरफील्ड्स पर हमला किया था। इसके बाद यह युद्ध शुरू हुआ और महज 13 दिन में भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तान को खदेड़ दिया था।

इंदिरा गांधी का बड़ा फैसला

अमेरिका द्वारा दी गई चेतावनियाें के बावजूद मार्च 1971 के अंत में भारत सरकार ने मुक्ति वाहिनी की मदद करने का फैसला लिया। मुक्ति वाहिनी दरअसल पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद कराने वाली पूर्वी पाकिस्तान की सेना थी। मुक्ति वाहिनी में पूर्वी पाकिस्तान के सैनिक और हजारों नागरिक शामिल थे। 31 मार्च, 1971 को इंदिरा गांधी ने भारतीय सांसद में भाषण देते हुए पूर्वी बंगाल के लोगों की मदद की बात कही थी। 29 जुलाई, 1971 को भारतीय सांसद में सार्वजनिक रूप से पूर्वी बंगाल के लड़कों की मदद करने की घोषणा की गई। भारतीय सेना ने अपनी तरफ से तैयारी शुरू कर दी। इस तैयारी में मुक्तिवाहिनी के लड़ाकों को प्रशिक्षण देना भी शामिल था।

महानायक मेजर जनरल जैकब का शौर्य

मेजर जनरल जैकब को 1971 में भारतीय सेना की पूर्वी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ थे। जैकब को भारत ही नहीं बांग्लादेश में भी अनेक सम्मानों से नवाजा गया। सन् 1971 के युद्ध में जैकब ने ‘वॉर ऑफ मूवमेंट’ की रणनीति बनाई थी। इसके तहत भारतीय सेना को पाकिस्तानी सेना के कब्जे वाले शहरों को छोड़कर वैकल्पिक रास्तों से भेजा गया। 16 दिसंबर को फील्ड मार्शल मानेकशॉ ने लेफ्टिनेंट जनरल जैकब को ढाका जाकर पाकिस्तान से आत्म समर्पण कराने की तैयारी करने का आदेश दिया।

पाकिस्तानी जनरल नियाजी को करना पड़ा सरेंडर

मेजर जनरल जेएफआर जैकब ने ढाका जाकर पाकिस्तानी जनरल नियाजी से बात कर उन्हें सरेंडर करने को कहा था। जैकब ने नियाजी को आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के लिए आधे घंटे का समय दिया। उन्होंने यह साफ कर दिया था कि अगर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए गए तो नियाजी और उनके परिवार वालों की सुरक्षा करेंगे। इसके बाद ढाका के रेसकोर्स मैदान में जनरल नियाजी ने मेजर जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

पाकिस्तानी जनरल की आंखों में आ गए आंसू

जैकब ने बताया था कि उन्होंने पाकिस्तानी नजरल नियाजी से तलवार सौंपने को कहा था। नियाजी ने कहा था कि उसके पास तलवार नहीं है। तब जैकब ने उसे पिस्टल देने को कहा। जब नियाजी लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह आरोड़ा को अपनी पिस्टल दे रहे था तो उनकी आंखों में आंसू थे।

भारतीय सेना का शौर्य

भारतीय सेना ने उस समय अमेरिका और चीन के डर को खत्म करते हुए पाकिस्तान को धूल चटा दी थी। भारतीय जांबाजों ने मुक्ति वाहिनी को जमकर मदद की और पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए।

3,000 सैनिकों का जज्जा और पाकिस्तान पस्त

पाकिस्तानी जनरल नियाजी के पास ढाका में 26 हजार से ज्यादा सैनिक थे जबकि भारत के पास ढाका से 30 किलोमीटर दूर महज 3 हजार ही सैनिक थे। लेकिन भारतीय सैन्य कमांडरों की हिम्मत और जज्बे के कारण पाकिस्तान पूरी तरह पस्त हो गया।

पाक के 93 हजार सैनिकों का आत्मसमर्पण

17 दिसंबर को पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को बंदी बना लिया गया था। इस युद्ध में भारत के करीब चार हजार सैनिक शहीद हुए थे।

इंदिरा पाकिस्तान में चर्चित शख्स

उन दिनों पाकिस्तान के लोगों के बीच इंदिरा गांधी सबसे चर्चित शख्सियत बन गईं। अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान में जब 80 के दशक में सैनिक तख्तापलट के बाद प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दी जाने वाली थी तो पाकिस्तान में ये कहा जा रहा था कि अगर इंदिरा सत्ता में होतीं तो कमांडो भेजकर भुट्टो को छुड़वा लेतीं। जिस तरह इंदिरा गांधी ने अमेरिका की आंखों में आंखें डालकर पाकिस्तान के दो टुकड़े किए और नया देश बनवाया, वो शायद ही कोई प्रधानमंत्री कर सकता था या ऐसा करने की उसकी हिम्मत होती। पाकिस्तान के खिलाफ वर्ष 1971 के युद्ध के दौरान उन्होंने तब दुनिया की दो महाशक्तियों को जिस तरह आमने सामने खड़ा करके सैन्य कार्रवाई की। उन्होंने बांग्लादेश को नया देश बनाया।

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