क्‍यों मनाते हैं 26 जनवरी का दिन, क्‍या है इतिहास और महत्‍व, जानें

कोलकाता : भारत में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। साल 2022 में यानी इस साल देश अपना 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। साल 1947 में देश को ब्रिट‍िश राज से स्‍वतंत्रता तो मिल गई थी, लेकिन उसके पास अपना संविधान नहीं था। 26 जनवरी 1950 को भारत को अपना संविधान मिला। इसी दिन भारतीय संविधान लागू हुआ और इसी के साथ भारत एक संप्रभु राज्‍य बन गया, जिसे गणतंत्र घोष‍ित किया गया। डॉ बीआर अंबेडकर ने संविधान की मसौदा समिति की अध्यक्षता की। गणतंत्र घोष‍ित किया गया, इसलिये इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
गणतंत्र दिवस पूरे देश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य आकर्षण परेड है जो राजपथ, दिल्ली से शुरू होती है और इंडिया गेट पर समाप्त होती है। इस दिन देश के राष्ट्रपति राजपथ, नई दिल्ली में झंडा फहराते हैं। इस दिन कल्‍चरल प्रोग्राम के साथ भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना भी भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत, परेड और एयरशो के जरिये प्रदर्शित करते हैं।
गणतंत्र दिवस का इतिहास
26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ। संविधान सभा, जिसका उद्देश्य भारत के संविधान का मसौदा तैयार करना था, ने अपना पहला सत्र 9 दिसंबर, 1946 को आयोजित किया। अंतिम विधानसभा सत्र 26 नवंबर, 1949 को समाप्त हुआ और फिर एक साल बाद संविधान को अपनाया गया।
गणतंत्र दिवस का महत्‍व
गणतंत्र दिवस स्वतंत्र भारत की भावना का प्रतीक है। इसी दिन 1950 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी, जो औपनिवेशिक शासन से भारत की स्वतंत्रता की घोषणा थी। यह दिन भारतीय नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने की शक्ति का भी स्मरण कराता है। राष्ट्र इस दिन को भारतीय संविधान की स्थापना के लिए राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाता है।

 

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