क्या होता है ये पल्स ऑक्‍सीमीटर, कोरोना में क्यों है जरूरी?

कोलकाताः कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर से चिंता बढ़ा दी है। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से कड़ी पाबंदियां लगाई जा रही हैं। देश के ​कई हिस्सों से अस्पतालों में बेड नहीं मिलने की खबरें आ रही हैं। ऐसे में लोगों के बीच डर का माहौल बन रहा है। हालांकि जरूरत कोरोना से डरने के बजाय कोरोना से लड़ने की है। पल्मोनरी डिजीज एक्सपर्ट डॉक्टर बताते हैं​ कि संक्रमित होने वाले हर मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती।

देशभर में लाखों कोरोना मरीज होम आइसोलेशन में हैं। दवाओं के जरिये वे ठीक भी हो जा रहे हैं। फिर किन लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है? यही वो सवाल है, जिसके बारे में जानकारी होनी जरूरी है। एक विशेषज्ञ चिकित्सक ने बताया था कि कोरोना का संक्रमण अगर फेफड़े तक पहुंचता है, तो मरीज को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। उनके शरीर में अगर ऑक्‍सीजन लेवल कम होता है, तो डॉक्टर को सूचित करना चाहिए और उनकी सलाह पर मरीज को अस्पताल या क्लिनिक ले जाना चाहिए।

ऑक्‍सीजन लेवल कितना होना चाहिए?

स्वस्थ्य सामान्य व्यक्ति के ब्लड में ऑक्सीजन का सैचुरेशन लेवल 95 से 100 फीसदी के बीच होता है। 95 फीसदी से कम ऑक्सीजन लेवल इस बात का संकेत है कि उसके फेफड़ों में किसी तरह की परेशानी है। अब सवाल यह है कि कोरोना की स्थिति में आखिर कब अस्पताल ले जाने की जरूरत होगी!

इस बारे में विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑक्सीजन लेवल 92 फीसदी से नीचे हो तो समझिए व्यक्ति की स्थिति गंभीर है और उसे अस्पताल ले जाना चाहिए। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ने की संभावना रहती है। हालांकि यह मानक सामान्य व्यक्ति के लिए है। पहले से किसी बीमारी के मरीज में स्थिति अलग हो सकती है, जिसके लिए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

 

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