सीबीएसईः ऐसे समझें, 30:30:40 मार्किंग पैटर्न की गणित

नई दिल्लीः सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा रद्द किए जाने के बाद छात्रों और अभिभावकों में इस बात को लेकर मंथन था कि मार्किंग या मुल्यांकन का तरीका क्या होगा। सुप्रीम कोर्ट के सामने इस विषय पर सीबीएसई की तरफ से फार्मूला सुझाया गया कि छात्रों को मार्क्स 30: 30: 40 के आधार पर दिए जाएंगे। इसके साथ ही सीबीएसई ने यह भी कहा कि जो छात्र अपने अंकपत्र से संतुष्ट नहीं होंगे उन्हें हालात सामान्य होने पर परीक्षा का मौका भी दिया जाएगा।

शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का खास ट्वीट
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीएसई के मार्किंग पैटर्न पर मुहर लगाने पर शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट किया, बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों का परिणाम तैयार करने के लिए  की नीति एवं प्रक्रिया को संस्तुति प्रदान करने हेतु भारत के सर्वोच्च न्यायालय का बहुत-बहुत आभार!

अब यहां पर हम आपको बताएंगे 12वीं कक्षा के लिए 30: 30: 40 मार्किंग पैटर्न क्या है- पूरी व्याख्या

सीबीएसई की परीक्षा में दो सेक्शन होते हैं पहला थ्योरी और दूसरा प्रैक्टिकल। प्रैक्टिकल सेक्शन में अंकों का बंटवारा 20 से 50 नंबर तक का है।  12वीं परीक्षा में प्रैक्टिकल के नंबर में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। उदाहरण के लिए अगर किसी छात्र ने 20 नंबर हासिल किया है तो पूरे  20 नंबर जोड़े जाएंगे।

अगर बात थ्योरी की करें तो यह एक विषय से दूसरे विषय में 50 से 80 नंबर तक होता है। मसलन कुछ विषय 50 नंबर वाले होते हैं तो कुछ विषय 80 नंबर के। अब इसमें सीबीएसई ने 30:30:40 रेशियो में बांटा है। इसका अर्थ यह है कि 12वीं परीक्षा परिणाम बनाने में थ्योरी के पेपर में क्लास 10 के लिए 30 फीसद, क्लास 11 के लिए 30 फीसद और क्लास 12 के लिए 40 फीसद का बंटवारा है।

सबसे पहले कक्षा 10 के पांच मुख्य विषयों में से तीन विषयों का चयन किया जाएगा जिसमें छात्र का प्रदर्शन अच्छा रहा है। उन तीन विषयों में थ्योरी में पाए गए मार्क्स का औसत निकाल कर उसका 30 फीसद अंक 12वीं का रिजल्ट बनाने में प्रयोग किया जाएगा। कक्षा 11 के फाइनल एग्जाम में थ्योरी के नंबर को शामिल किया जाएगा और उसका तीस फीसद 12वीं के रिजल्ट में प्रयोग होगा कक्षा 12 में यूनिट टेस्ट, मिड टर्म टेस्ट और प्री बोर्ड के एग्जाम में हासिल मार्क्स का 40 फीसद लिया जाएगा। कक्षा 12वीं में प्रैक्टिकल या आंतरिक परीक्षा में जितना मार्क्स छात्र को मिला होगा उसे स्कूल हूबहू सीबीएसई पोर्टल पर अपलोड करना होगा।

उदाहरण के लिए हम पांच विषयों के थ्योरी के अधिकतम मार्क्स का जिक्र करेंगे। जैसे पांचों विषय के अधिकतम मार्क्स क्रमश: 80, 70, 60, 50 और 30 है तो नियम के हिसाब से क्लास 10 और क्लास 11 के लिए यह 24, 21, 18, 15 और 9 होंगे। जबकि कक्षा 12 के लिए यह 32, 28, 24, 20 और 12 होंगे। प्रैक्टिल के नंबर में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा यानि वो 30:30:40 के दायरे से बाहर होंगे।
अब हम यहां क्लास 10 में पाए गए अंकों के 30 फीसद का मतलब बताएंगे।

इसे आप ऐसे समझ सकते हैं, मान लीजिए किसी छात्र ने इंग्लिश में 74, मैथ्स में 65, साइंस में 70, सोशल साइंस में 68 और हिंदी में 60 नंबर पाया। इसके साथ ही प्रैक्टिल में उसे इन सभी विषयों में 20 नंबर मिले हों तो मुल्यांकन कुछ इस तरह होगा। सबसे पहले उन तीन विषयों को लिया जाएगा जिसमें छात्र ने बेहतर प्रदर्शन किया है और उसका तीस फीसद निकाला जाएगा। अब अगर यहां बात करें तो अंग्रेजी, साइंस और सोशल साइंस के नंबर को जोड़कर उसका औसत लिया जाएगा। उसके बाद इसे 30 फीसद के हिसाब से कैलकुलेट किया जाएगा।जैसे 80 नंबर के पेपर में 70.67 का तीस फीसद किया जाएगा जो करीब 24 होगा।

क्लास 11 का 30%
यह एक सीधी गणना है। स्कूलों को छात्र द्वारा चुने गए विषयों के सिद्धांत घटक के केवल अंतिम अंक पर विचार करना होता है। जबकि कक्षा 10 के औसत अंक को एक अंक के रूप में लिया गया था, कक्षा ११ के लिए, स्कूल उस विशेष विषय में कक्षा 11 की परीक्षा के अंतिम अंक लेंगे और इसकी गणना करेंगे।तो, मान लीजिए कि कक्षा 11 में एक छात्र ने अंग्रेजी में 80 में से 65 अंक प्राप्त किए, सारणीकरण के उद्देश्य से, स्कूल समान अंक लेगा। इसके लिए छात्र अंतिम सारणी में 24 में से 19.5 अंक प्राप्त करेंगे।

क्लास 12 का 40 %

कक्षा 12 के लिए, स्कूल द्वारा निर्धारित परिणाम समिति उन अंकों को तय करेगी जिन पर विचार किया जाएगा। स्कूल मध्य-अवधि और प्री-बोर्ड या केवल प्री-बोर्ड परिणाम के भारित औसत पर विचार कर सकते हैं। यह फिर से, सिद्धांत में प्राप्त अंक होंगे। अब, फिर से, सुविधा के लिए, मान लें कि स्कूल केवल छात्र की प्री-बोर्ड परीक्षा के औसत अंक लेने का निर्णय लेता है।अब, फिर से एक उदाहरण लेते हुए, मान लें कि छात्र ने प्री-बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी में 70 में से 70 अंक प्राप्त किए। अब, स्कूल इन अंकों की गणना 40% या 32 में से करेगा, जो कि 28 आता है।

छात्र और अभिभावक को यहां ध्यान देने की जरूरत है कि यह केवल एक संभावित योजना है। ऊपर दिए गए अंक केवल संदर्भ के लिए हैं। साथ ही, कक्षा 12 के लिए मानदंड हर स्कूल में अलग-अलग होंगे। इसके अलावा, एक बार स्कोर की गणना करने के बाद, इसे मॉडरेशन के अधीन किया जाएगा, जैसे कि कक्षा 10 में जहां पिछले तीन वर्षों के स्कूल के परिणाम पर विचार किया जाएगा।

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