पुरातत्व विभाग की तैयार की गई रिपोर्ट में सबसे प्रमुख थे के के मुहम्मद

k k muhammed

नई दिल्ली : अयोध्या मामले में शीर्ष न्यायलय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश दिया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के दौरान पुरातत्व विभाग (एएसआई) के रिपोर्ट की मदद ली गई थी। इस विभाग में सबसे प्रमुख नाम के के मुहम्मद का है जिन्होंने रिपोर्ट तैयार की थी। शनिवार को शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट की स्‍थापना करने के लिए योजना तैयार करना होगा। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष यानी कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं और 5 अकड़ की जमीन देने को कहा है। शीर्ष न्यायलय ने अपने फैसले में कहा है कि नतीजा धर्म और आस्‍था के आधार पर नहीं लिया गया है और संविधान की नजर में सब एक समान है। न्यायालय ने अपने निर्णय में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिपोर्ट का भी सहारा लिया है। इलाहाबाद उच्च न्यायलय के फैसले के दौरान भी एएसआई रिपोर्ट की मदद ली गई थी।

कोई इस्लामिक ढांचा नहीं था

अपने फैसले में शीर्ष न्यायालय ने सपष्ट तौर पर कहा कि एएसआई की रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि बाबरी मस्जिद के नीचे कोई इस्लामिक ढांचा नहीं था। मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई और पांच सदस्यों वाली पीठ ने यह भी कहा है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई थी। यह बात भी एएसआई की रिपोर्ट में लिखी गई है। रिपोर्ट कहती है कि अयोध्या में केवल हिंदू समुदाय का महत्व नहीं है। मुसलमानों का भी इससे इतिहास जुड़ा है। ऐसे ही मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई है और इसके पीछे काेरी आस्‍था नहीं है। न्यायालय में बाबरी मस्जिद को कमजोर साबित करने वाले पुरातात्विक सबूतों को पेश करने में 53 मुसलमान भी शामिल थे जिसमें से सबसे प्रमुख नाम केके मुहम्मद का है।

केके ने लिखा-तीन बार ध्वस्त हुआ मंदिर

केके मुहम्मद ने आत्ककथा जानएन्ना भारतीयन में इस बारे में वर्णन करते हुए लिखा है कि साल 1976-77 में ही सिद्ध हो चुकी थी कि बाबरी मस्जिद असल में मंदिर है। विदेशी कार्यकाल में पीटर कारनेगी ने भी कहा है कि स्‍थानीय तौर पर यह साबित होती है कि जब मुसलमानों ने जीत प्राप्त की उस वक्त अयोध्या में हिंदू धर्म के तीन महत्वपूर्ण मंदिर मौजूद थे। इन मंदिरों के नाम जन्मस्थान,स्वर्गद्वार और ठाकुर मंदिर थे। सबसे पहले बाबर ने मस्जिद बनवाया था जिस पर उसका नाम खुदा था। उसके बाद औंरगजेब ने भी दूसरी मंदिर के साथ बिलकुल एेसा ही किया। तीसरे मंदिर पर भी बाद में मस्जिद का निर्माण किया गया था। दरअसल, यह सब इस्लाम के प्रसिद्व सिद्वांत पर आधारित था जिसके मुताबिक हर जीती हुई जगह पर धर्म सौंप दिया जाता है। मालूम हो कि केके महुम्मद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के क्षेत्रीय निदेशक रह चुके है। हिंदी में उनकी आत्मकथा मैं भारतीय हूं के नाम से मशहूर है।

मंदिर के मलबे पर खड़ा है मस्जिद

पहले ब्रिटिश कमिश्नर ‌कारनेगी ने अवध का पहला गजेटियर (क्षेत्र-विशेष का वर्णनात्मक विवरण) तैयार किया था। कारनेगी की लिखाई से साफ जाहिर होता है कि राम के जन्मस्‍थान पर ही बाबरी मस्जिद का निमार्ण किया था। जानकारी के अनुसार फैजाबाद अदालत के मुलाजिम हफीजुल्ला ने भी साल 1822 में एक रिपोर्ट पेश की थी। उस रिपोर्ट में भी यही बात कही गयी है। अगर हम ‌कारनेगी और हफीजुल्ला के दावों को न भी मानें तो खुदाई के दौरान मिले सबूत सच्चाई को दुहराते है कि बाबरी मस्जिद को मंदिर के मलबे पर खड़ा किया गया है। अपनी आत्मकथा जानएन्ना भारतीयन में खुदाई के बारे में मुहम्मद ने लिखा कि विवाधित धार्मिक स्‍थल से 14 स्तंभ मिले है जिनमें गुंबद खुदे हुए थे। ये गुंबद 11वीं और 12वीं शताब्दी के मंदिरों से मेल खाता है। इन गुंबदों में ऐसे 9 प्रतीक प्राप्त हुए जो मंदिरों से मिलते जुलते हैं।

मस्जिद की दीवारों में मंदिर के खंभे मौजूद थे

पुरातात्विक अध्ययन के लिए प्रो. बीबी लाल के नेतृत्व में खुदाई की गई थी जिसमें केके महुम्मद भी शामिल थे। महुम्मद ने बताया कि जब हम खुदाई के लिए पहुंचे तो हमे मस्जिद ‌की दीवारों पर मंदिर के खंभे स्पष्ट रुप से दिखाई दिए। सारे स्तंभों का निर्माण ब्लैक बेसाल्ट से किया गया था। स्तंभ के निचले हिस्से के पास 11वीं और 12वीं सदी के मंदिरों में पाए जाने वाले कलश के निशान बने हुए थे। महुम्मद ने बताया कि जब अयोध्या का मामला गंभीर होने लगा तब खुदाई की रिपोर्ट को लेकर आशंका हुई। उच्च न्यायलय के निर्देश पर एएसआई ने 2 मार्च 2003 से 7 अगस्त 2003 के बीच राम जन्मभूमि जमीन की खुदाई शुुरु की। इस उत्‍खनन में 137 मजदूरों को काम पर लगाया गया जिनमें से 52 मुसलमान थे।

विवादित जमीन हिंदू पक्ष को सौंपी गई

एएसआई ने अपनी 574 पन्नों की रिपोर्ट 22 सितंबर 2003 को उच्च न्यायालय को सौंप दी। सारे सबूतों और साक्ष्यों के आधार पर उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों ने माना कि विवादित स्‍थल का मुख्य स्‍थान रामजन्मभूमि ही है। सबसे खास बात यह है कि तीनों न्यायाधीश गर्भगृह के सवाल पर एकमत थे। आज शीर्ष न्यायालय के पांच सदस्यों वाली पीठ ने भी इस फैसले पर हामी भर दी है।

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