राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसले में न्यायालय ने दिया इस रिपोर्ट का हवाला

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नई दिल्ली : अयोध्या भूमि विवाद मामले में शनिवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया गया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से विवादित जमीन को रामलला विराजमान की बताया है। उन्होंने मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया है। इसी के साथ अयोध्या में ही मस्जिद बनाने का इंतजाम भी कर दिया। न्यायालय के इस फैसले में पुरातत्व विभाग के मामले से जुड़ी रिपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बता दें कि अगस्त 2019 को न्यायालय ने इस मुद्दे की दैनिक सुनवाई सुनिश्चित की और 16 अक्टूबर तक 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद अपना अंतिम फैसला शनिवार को सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विवादित भूमि पर मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र सरकार एक ट्रस्ट बनाए। इसके लिए केंद्र को तीन महीने के भीतर नियम बनाने के आदेश दिए गए हैं।

पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट का दिया हवाला

गौरतलब है कि 1045 पेज के फैसले में कोर्ट ने पुरातत्व विभाग द्वारा विवादित जमीन पर किए गए उत्खनन की रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। न्यायालय द्वारा यह कहा गया कि हम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की खुदाई में मिले सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। मस्जिद के नीचे विशाल संरचना थी, और जो कलाकृतियां प्राप्त हुई हैं वह इस्लामिक नहीं थीं। अयोध्या विवादित भूमि के उत्खनन (खुदाई) की रिपोर्ट को नवंबर 2018 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया था।

2002 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिया खुदाई का प्रस्ताव

मालूम हो कि एक अगस्त 2002 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा विवादित स्थल की खुदाई करने का प्रस्ताव दिया था। उच्च न्यायालय ने अपने इस प्रस्ताव में कहा कि खुदाई से पहले एएसआई ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जमीन के भीतर मौजूद वस्तुओं की जानकारी देने वाला उपकरण) या भू-रेडियोलॉजी प्रणाली का उपयोग करके विवादित स्थल का सर्वेक्षण करे।

रिपोर्ट में सामने आई स्‍थल से जुड़ी विसंगतियां

एएसआई ने विवादित स्‍थल पर जीपीआर सर्वेक्षण किया था। यह सर्वेक्षण कॉर्पोरेट इकाई (तोजो विकास इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड) के माध्यम से किया गया था। इसकी रिपोर्ट 17 फरवरी 2003 को उच्च न्यायालय के पास भेजी गयी थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक रामचबूतरा से संबंधित गर्भगृह के उत्तर और दक्षिण के मुख्य मंच के पास कुछ विसंगतियां पाई गयी थीं।

इन दलीलों पर भी किया गया विचार

इसके साथ ही ऐसे सबूत भी पाए गए हैं जिनसे यह स्पष्ट हो जाता है ‌कि अंग्रेजों के शासनकाल में राम चबूतरा और सीता रसोई में पूजा हुआ करती थी। सालों पहले हिंदुओं के पास विवादित जमीन के बाहरी हिस्से का कब्जा था। दरअसल, हिंदू बाहरी परिसर में पूजा किया करते थे और भीतर की ओर मुस्लिम नमाज पढ़ा करते थे। हालांकि गर्भगृह पर भी हिंदू अपना दावा करते थे। लेकिन मुस्लिम पक्ष यह दावा कर पाने में नाकाम रहा कि 1857 से पहले इस स्‍थल पर मुस्लिमों द्वारा नमाज पढ़ी जाती थी। वहीं, इस स्‍थल को हिंदू भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं। हिंदुओं का मानना है कि भगवान राम का जन्म केंद्रीय गुंबद के नीचे हुआ था।

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