‘वह बहुत डरावना था’..ओमीक्रॉन के बारे में…

नई दिल्लीः ओमीक्रॉन ऐसा नाम जिसकी चर्चा जोरों पर है। दुनियाभर के रिसर्चर्स और वैज्ञानिक इस पर स्टडी कर रहे हैं। साउथ अफ्रीका में पहला केस मिला, जिसके बाद से दुनिया के तमाम देश साउथ अफ्रीका से आने-जाने वाली फ्लाइट्स पर बैन लगा रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में ओमीक्रॉन का पहला केस किसने पता लगाया? उस व्यक्ति को कैसा लगा जब उसने कोविड के इस वेरिएंट को देखा? साउथ अफ्रीका के उस वैज्ञानिक का नाम राकेल वियाना है। उनकी पहली प्रतिक्रिया थी कि यह बहुत डरावना था।

पहले तो यकीन ही नहीं हुआ कि ये ओमीक्रोन है
साउथ अफ्रीका के वैज्ञानिक राकेल वियाना ने कहा, मैं जो देख रहा था उससे काफी हैरान था। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें 19 नवंबर को ही अंदाजा हो गया था कि इस वेरिएंट से दुनिया पर बड़ा असर पड़ने वाला है। साउथ अफ्रीका में लैंसेट लैब के साइंस हेड रकील वियाना ने कहा, मैं जो देख रहा था, उससे काफी हैरान थी। पहले तो मुझे डाउब्‍ट हुआ कि कहीं मैंने इस प्रक्रिया में कोई गलती तो नहीं की है। फिर 23 नवंबर तक जोहान्सबर्ग और प्रिटोरिया के आसपास से 32 और सेंपल का टेस्ट करने के बाद यह स्पष्ट था कि एनआईसीडी में एक जीन सीक्वेंसर है। उस दिन एनआईसीडी टीम ने हेल्थ डिपार्टमेंट और साउथ अफ्रीका की दूसरी लैब्स को सीक्वेंसिंग करते हुए भेजा और सभी लैब्स में एक ही रिजल्ट सामने आया। रिजल्ट को जीआईएसएआईडी ग्लोबल साइंड डाटाबेस में फीड किया गया था। एनआईसीडी को पता चला कि बोत्सवाना और हांगकांग ने भी ऐसे ही जीन वाले सीक्वेंस की खबर दी थी। इसके बाद डब्ल्यूएचओ को सूचित किया गया। कुछ ही दिनों में साउथ अफ्रीका के गौतेंग प्रांत में ओमीक्रोन के केस सामने आने लगे।

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