लखीमपुर पहुंचा तृणमूल सांसदों का दल, पीड़ितों से की मुलाकात

144 धारा की वजह से रास्ते में रोके गये थे सांसद,
मोटरसाइकिल पर सवार होकर पहुंचे किसानों के घर
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी इस वक्त राजनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा बना है। रविवार को वहां भड़की हिंसा के बाद मारे गये किसान समेत 8 लोगों की मौत की घटना के बाद वहां राजनीति पूरी तरह गरमा गयी है। विपक्ष का पूरा खेमा मानों लखीमपुर पहुंचने के लिए होड़ में है। कोशिश सभी ने की मगर पीड़ितों तक तृणमूल का प्रतिनिधिदल ही पहुंच पाया। मारे गये किसानों के परिजनों से मिलने मंगलवार को तृणमूल के सांसद लखीमपुर पहुंचे। ममता बनर्जी के निर्देश पर सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को ही लखीमपुर के लिए रवाना हुआ था लेकिन वहां 144 धारा लगने की वजह से तृणमूल के सांसदों को रास्ते में ही रोक दिया गया था।
दो भागों में लखीमपुर पहुंचे तृणमूल के सांसद

 

तृणमूल के प्रतिनिधि सोमवार को ही लखीमपुर के लिए रवाना हुए थे लेकिन वहां धारा 144 लागू होने की वजह से रास्ते में ही उन्हें रोक दिया गया। बावजूद इसके ये सांसद दो भागों में बंट कर लखीमपुर किसानों के घर तक पहुंचे। मंगलवार की सुबह सांसद दोला सेन, प्रतिमा मंडल और अबीर रंजन बिश्वास मोटरसाइकिल पर सवार होकर पीड़ितों के घर पहुंचे। दूसरी तरफ सांसद काकुली घोष दस्तीदार और सुष्मिता देव भी सड़क मार्ग से शाम के वक्त मौके पर पहुंची तथा पीड़ितों का दर्द बांटा।
विपक्ष को नहीं मिली पीड़ितों से मिलने की इजाजत
लखीमपुर में पीड़ितों से मिलने के लिए पूरा विपक्ष आगे बढ़ आया है लेकिन किसी को भी वहां जाने की इजाजत नहीं दी गयी। प्रियंका गांधी को हिरासत में लेने के बाद शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को अनुमति ही नहीं मिली। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेन बघेल को लखनऊ एअरपोर्ट पर भी रोक दिया गया जहां वह जमीन पर बैठ गये। इस​ तरह विपक्ष का एक भी नेता वहां तक नहीं पहुंच पाया लेकिन तृणमूल के सांसद पीड़ितों से मिले, उनकी समस्या सुनी तथा क्या मांगे है वह भी जाना। यह पूरा प्रकरण अपने आप में राजनीति में एक ​अलग दिशा की तरफ इशारा करता दिख रहा है।

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