‘कुत्तों को रखने का मतलब यह नहीं कि आप लोगों के जीवन में परेशानी खड़े करें’: सुप्रीम कोर्ट की फटकार

नई दिल्ली: एक महिला की आवारा कुत्तों को संरक्षण देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता बहुत दिनों से कुत्तों की देखभाल कर रही है। इस मामले में की सुनवाई जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम सुंद्रेश की बेंच ने की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि फिलहाल आवारा कुत्तों के मामले में अन्य बेंच सुनवाई कर रही है तो यह मामला भी उन्हीं के सामने उठाया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों को रखने का मतलब यह नहीं है कि आप उन्हें सड़कों पर ले जाएं, लड़ाई करें और लोगों के जीवन में परेशानी खड़े करें। पीठ ने अपने आदेश में कहा, जैसा कि यह बताया गया है कि इसी तरह के मुद्दे पर एक अन्य पीठ सुनवाई कर रही है इसलिए वर्तमान रिट याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।

उच्चतम न्यायालय मध्य प्रदेश की समरिन बानो की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें दावा किया गया है कि राज्य में आवारा कुत्तों को सुरक्षा प्रदान नहीं की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

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