श्रीकृष्ण जन्मस्थान मामले में दायर वाद खारिज, खटखटाएंगे हाईकाेर्ट का दरवाजा

आगरा: आज श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शाही मस्जिद ईदगाह हटाने को लेकर दायर याचिका को सुनवाई के बाद सिविल जज की अदालत ने ‘पर्याप्त आधार’ की कमि में खारिज कर दिया। अब वादी पक्ष इस मामले में हाईकोर्ट का रुख करने का विचार कर रही है।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शाही मस्जिद ईदगाह हटाने को लेकर श्रीकृष्ण विराजमान अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री समेत आठ लोगों ने सिविल जज सीनियर डिवीजन छाया शर्मा की अदालत में दावा दायर किया था। इस मामले में सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई थी।

यहां क्लिक कर जानिए क्या है पूरा विवाद

क्या थी वादी पक्ष की दलील

वादी पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम है। पर शाही मस्जिद ईदगाह प्रबंधक ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के साथ समझौता किया था। चूंकि जमीन का मालिक ट्रस्ट है ऐसे में सेवा संघ को समझौता करने का अधिकार ही नहीं है इसलिए इस समझौते को अवैध मान कर रद किया जाए। कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया वरशिप एक्ट 1991 यहां लागू नहीं हुआ होता है, क्योंकि 1968 में समझौता हुआ है और उसकी डिक्री 1973 में हुई है। उन्होंने कहा कि संकल्प अमर है और महाराजा पटनीमल ने मंदिर बनाने के संकल्प के साथ ही ये जमीन खरीदी थी।

वादी के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने बताया कि अदालत ने बाहरी लोगों द्वारा दावा दायर करने पर आपत्ति जताई थी। इस पर उन्होंने तर्क दिया कि भगवान सबके हैं, पूरी दुनिया उनकी पूजा करती है, इसलिए कोई भी अपना दावा दायर कर सकता है। करीब 22 मिनट तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने ये कहकर दावा खारिज कर दिया कि केस चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। वादी के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा, ‘हम इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में अपील करेंगे।’

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