भारत के साथ शिंजो आबे का खास रहा है रिश्ता…

नई दिल्ली :  जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पर जानलेवा हमला हुआ है। उनपर ये हमला तब हुआ, जब वो नारा शहर में एक सड़क पर भाषण दे रहे थे। पुलिस ने हमलावर को पकड़ लिया है। हमलावर ने आबे पर गोली चलाई थी। गोली लगने के बाद आबे की हालत नाजुक बनी हुई है। जापान के पत्रकारों और मीडिया संस्थानों का कहना है कि जब शिंजो आबे सड़क पर भाषण दे रहे थे, तब एक हमलावर ने पीछे से उनपर गोली चलाई। गोली लगने के बाद आबे बेहोश हो गए।  हमलावर को पुलिस ने तुरंत दबोच लिया. हमलावर की उम्र 41 साल बताई जा रही है। हालांकि, अब तक गोली चलाने का कारण सामने नहीं आया है। शिंजो आबे सबसे लंबे समय तक जापान के प्रधानमंत्री रहे हैं। वो पहली बार 2006 से 2007 तक प्रधानमंत्री रहे। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। बाद में 2012 में आबे फिर से प्रधानमंत्री बने और अगस्त 2020 तक इस पद पर बने रहे। अगस्त 2020 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। आबे ने भले ही प्रधानमंत्री का पद छोड़ दिया हो, लेकिन वो अब भी सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी में काफी प्रभावी हैं।
कौन हैं शिंजो आबे?

– शिंजो आबे का जन्म 21 सितंबर 1954 को हुआ था। आबे एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके नाना नोबुसुके किशी ने दूसरे विश्व युद्ध में सेवा की थी। युद्ध के दौरान जापानी प्रधानमंत्री हिदेकी टोजो की सरकार में मंत्री भी रहे थे।

– युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका ने वॉर क्राइम का दोषी मानते हुए किशी को जेल में डाल दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गय था। 1955 में किशी ने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना में मदद की थी। 1957 से 1960 तक किशी जापान के प्रधानमंत्री रहे थे।

– आबे के दादा कान आबे जमींदार थे और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सांसद थे। जबकि, उनके पिता शिंतारो आबे 1958 से 1991 तक सांसद रहे और मंत्री रहे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान शिंतारो पायलट बनना चाहते थे, लेकिन उनकी ट्रेनिंग पूरी होने से पहले ही युद्ध खत्म हो गया।

– आबे ने सेकेई स्कूल से अपनी पढ़ाई की। बाद में 1977 में सेकेई यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद वो आगे की पढ़ा के लिए अमेरिका चले गए। अमेरिका से लौटने के बाद आबे ने एक कंपनी में काम शुरू किया, लेकिन बाद में नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए।

– 1991 में पिता की मौत के बाद 1993 में आबे पहली बार सांसद चुने गए। 26 सितंबर 2006 को आबे पहली बार प्रधानमंत्री चुने गए। उस समय उनकी उम्र 52 साल थी। फुमिमारो कोनोए के बाद आबे सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। हालांकि, एक साल बाद ही खराब तबीयत के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

– 2012 में जापान में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई। तब के प्रधानमंत्री योशिहिको नोडा ने संसद भंग कर दी और चुनाव कराए। इस चुनाव में आबे मजबूती से आगे आए। आबे की पार्टी ने 480 में से 294 सीट जीतीं। 26 दिसंबर 2012 को आबे दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।अगस्त 2020 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया.
भारत से कैसा रहा है नाता?

– शिंजो आबे का भारत से खास नाता रहा है। वो सबसे ज्यादा भारत आने वाले जापान के पहले प्रधानमंत्री हैं। अपने पहले कार्यकाल में आबे 2006 में पहली बार भारत आए थे। उस समय उन्होंने भारत में संसद को संबोधित भी किया था।

– 2012 में फिर से प्रधानमंत्री बनने के बाद आबे 2014 में भारत आए थे। वो 26 जनवरी की परेड के मुख्य अतिथि थे। आबे जापान के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो 26 जनवरी की परेड के मुख्य अतिथि रहे थे। इसके बाद आबे ने दिसंबर 2015 और सितंबर 2017 में भी भारत का दौरा किया।

– दिसंबर 2015 में जब आबे भारत दौरे पर आए थे, तब वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाराणसी गए थे। उस समय वाराणसी इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशनल सेंटर की घोषणा की। इस प्रोजेक्ट को जापान की मदद से बनाया गया है। इसमें जापान ने 186 करोड़ रुपये की मदद की थी।

– 14 जुलाई 2021 को जब पीएम मोदी ने वाराणसी कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन किया, तब उन्होंने शिंजो आबे को खासतौर से धन्यवाद दिया था। उस समय पीएम मोदी ने कहा था कि ‘इस आयोजन में एक और व्यक्ति हैं, जिनका नाम मैं नहीं भूल सकता।  जापान के ही मेरे मित्र- शिंजो आबे. शिंजो आबे जब काशी आए थे, तो रुद्राक्ष के आइडिया पर उनसे मेरी चर्चा हुई थी।

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