मोदी-उद्धव की मीटिंग से हलचल,पवार ने याद दिलाया बाल ठाकरे का वादा

नई दिल्ली : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार लंबे वक्त के बाद लोगों के सामने आए हैं, आते ही उन्होंने राज्य को लेकर चल रही अटकलों पर बयान दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच हुई मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है, लेकिन शरद पवार ने उन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है जिसमें महाराष्ट्र विकास अघाड़ी की सरकार पर खतरा होने के दावे किए गए। शरद पवार ने कहा कि हमारी सरकार पूरे पांच साल तक चलेगी, साथ ही याद दिलाया कि इमरजेंसी के वक्त जब पूरा देश इंदिरा गांधी और कांग्रेस के खिलाफ था। तब बाल ठाकरे ने इंदिरा गांधी को दिया अपना वादा निभाया था और उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ कोई चुनाव नहीं लड़ा था। एनसीपी प्रमुख ने कहा कि यही वजह है शिवसेना कभी वादाखिलाफी नहीं करती, जिसकी वजह से कोई अटकलें ना लगाएं। इतना ही नहीं, शरद पवार ने संकेत दिए कि सरकार के पांच साल पूरे होने के बाद भी उनकी पार्टी शिवसेना के साथ रह सकती है।
उद्धव और मोदी की वन टू वन मीटिंग की चर्चा…
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 7 जून को अजित पवार, अशोक चव्हाण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। लेकिन इससे ज्यादा चर्चा उद्धव और पीएम मोदी के बीच हुई 40 मिनट की मीटिंग को लेकर रही। वैसे तो मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का मिलना आम बात होती है। आधिकारिक तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उद्धव ठाकरे ने ये भी खुलासा किया था कि मराठा आरक्षण समेत कुल 12 मुद्दों पर पीएम मोदी के साथ बात हुई है। लेकिन वन टू वन मीटिंग को लेकर उद्धव ने कुछ राज नहीं खोला और साथ ही कहा कि पीएम मोदी के साथ अभी भी उनके रिश्ते कायम हैं। जिस हालात में महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार बनी, उनको देखते हुए इस मीटिंग के बाद हलचल देखने को मिली।
माना जा रहा है कि इस मुलाकात के जरिए उद्धव एनसीपी को संदेश देना चाह रहे थे कि भले ही महाराष्ट्र में बीजेपी के निशाने पर वो हैं, लेकिन दिल्ली में प्रधानमंत्री से उनकी दूरी ज्यादा नहीं है। राज्य में बीजेपी पर तीखे वार करने वाले उद्धव आमतौर पर प्रधानमंत्री पर नरम नजर आते हैं।
शरद पवार के बयान के कई मायने…
लेकिन शरद पवार ने जो बयान दिया है, उसके मायने जानने भी जरूरी हैं। उन्होंने जता दिया है कि उद्धव और पीएम मोदी की मीटिंग पर उनका ध्यान है, साथ ही बाला साहेब का उदाहरण देकर मुश्किल वक्त का वादा ना भूलने की नसीहत भी दे दी है। इतना ही नहीं, शरद पवार ने शिवसेना संग एक लंबे रिश्ते का हाथ भी बढ़ा दिया है। खास बात ये है कि उन्होंने इसमें कांग्रेस का जिक्र नहीं किया, ऐसे में फोकस दो क्षेत्रीय पार्टियों को साथ लाकर राष्ट्रीय पार्टियों को दरकिनार करने पर भी है। बता दें कि महाराष्ट्र में अक्सर बंद दरवाजे में हुई मीटिंग के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगती हैं। फिर चाहे 2019 में अमित शाह और उद्धव ठाकरे के बीच हुई मीटिंग हो, जिसके सात महीने बाद राज्य की राजनीति ही बदल गई थी। उसके बाद एनसीपी-बीजेपी की मीटिंग के बाद भी हलचल हुई थी और अब उद्धव और पीएम मोदी की मीटिंग के बाद भी ऐसे ही हालात हैं।

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