33वां मूर्ति देवी पुरस्कार से सम्मानित किए जाएंगे कवि डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

नयी दिल्ली : साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और जाने माने कवि-आलोचक डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को प्रतिष्ठित 33वें मूर्तिदेवी पुरस्कार के लिए चुना गया है। भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक मधुसूदन आनंद ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर यह घोषणा की है। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर सत्यव्रत शास्त्री की अध्यक्षता में हुई निर्णायक मंडल की बैठक में डॉ. तिवारी को उनकी कृति ‘अस्ति व भवति’ के लिए यह पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया है।

10 वर्षों से प्रदान किया जा रहा पुरस्कार

मधुसूदन आनंद ने जानकारी दी है कि, डॉ. तिवारी को मुर्ति देवी पुरस्कार के तहत सरस्वती प्रतिमा, प्रशस्ति पत्र सहित चार लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। ज्ञानपीठ की ओर से दिए जाने वाला मूर्ति देवी पुरस्कार बीते 10 वर्षों से प्रदान किया जा रहा है। यह पुरस्कार संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त भाषा में लिखी गई कृति को दिया जाता है।

‘अस्ति व भवति’ है जीवन का आईना

अपने बयान में आनंद ने बताया कि डॉ. तिवारी कृत ‘अस्ति व भवति’ उनके 50 से अधिक वर्षों के सार्वजनिक जीवन का आईना है। इसमें डॉ तिवारी देश की समस्याओं, संकटों, विकास, राजनीतिक टकरावों, लेखकों के विचारों, वैश्विकरण के दौर में बदले मूल्यों से लेकर घर-परिवार, गांव-दुनिया से जुड़ी स्मृतियों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करते हैं।

‘दस्तावेज’ के संपादक हैं

बता दें कि 20 नवंबर 1940 को जन्में डॉ तिवारी लंबे वक्त तक गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़े रहे। वह साहित्यिक पत्रिका ‘दस्तावेज’ के संपादक भी हैं। इसके साथ ही उन्होंने साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी को भी संभाला है। डॉ तिवारी को महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन पुरस्कार, व्यास सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, पुश्किन सम्मान आदि से सम्मानित किया जा चुका है।

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