भारत पर जहर उगला …अपने ही घर में लपटें नहीं बुझा पा रहा पाकिस्तान

इस्लामाबाद : भारत पर जहर उगलने के लिए पाकिस्तान कोई कसर बाकी नहीं रखता जबकि उसके खुद के घर में एक के बाद एक संकट खड़े होते रहते हैं। पाकिस्तानी मीडिया भी अपनी सरकार की पोल खोलती रहती है और हालिया रिपोर्ट्स से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पड़ोसी मुल्क में राजनीतिक और आर्थिक स्थिति से लेकर सुरक्षा तक के हालात किस तरह चरमरा रहे हैं। जनता अपने प्रतिनिधियों से सवाल से पूछ रही है और सरकार को अपनी लापरवाही के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है।
बलूचिस्तान से ‘सौतेला’ व्यवहार
हाल ही में मोहम्मद अली जिन्नाह के मूर्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आई थी। इस पर ग्वादर के मरीन ड्राइव पर हैंड ग्रेनेड फेंक दिया गया था। हमले में मूर्ति ढह गई और बलूच रिपब्लिकन आर्मी ने इस हमले की जिम्मेदारी भी ली। दूसरी ओर, बलूचिस्तान के आदिवासी और राजनीतिक नेताओं ने एक बैठक कर प्रांत पर ध्यान न देने के लिए सरकार की निंदा की है।
…तो होगा जनआंदोलन
इन नेताओं की शिकायत है कि इलाके में मूलभूत जरूरतें ही नहीं पूरी की जा रही हैं, विकास की बात तो दूर है। यहां तक उनका कहना है कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर खस्ताहाल है, पीने के साफ पानी की कमी है, बिजली नहीं आती जिससे बिजनस बुरी तरह पस्त है। इन नेताओं ने मांग की है कि सरकार हालात सुधारने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए। ऐसा नहीं करने पर बड़े स्तर पर जनआंदोलन की धमकी दी गई है।
खुद की लगाई आग का डर
दूसरी ओर, देश के अंदर सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील सेक्टर्स में भ्रष्टाचार भी चिंता का सबब बना हुआ है। सीनेट कमिटी ने विदेशियों के साथ-साथ आतंकियों और बंद किए गए संगठनों को फर्जी पहचानपत्र देने का मुद्दा उठाया है। फेडरल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी के मुताबिक कई अफगान नागरिकों को NADRA से मिले आई कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया है।
अफगानिस्तान सीमा पर संकट गहराया
एफआइए ने संकेत दिया है कि NADRA का 50% स्टाफ भ्रष्टाचार में लिप्त है। यही नहीं, यह भी आरोप लगाया गया है कि अल-कायदा के सदस्य अब्दुल्लाह बरूच को NADRA को कई बार फर्जी आई कार्ड मिला है। पड़ोसी देश अफगानिस्तान में हाल में बदले हालात के चलते इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता है कि पाकिस्तानी सीमा की सुरक्षा के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है। तालिबान का साथ देने की कीमत यहां चुकाने की नौबत भी आ सकती है।
बेरोजगारी चरम पर
देश में भूख हड़ताल, सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक घटनाएं, आतंकी हमले, सरकारी अपहरण जैसी घटनाए आम होती जा रही हैं। कोरोना वायरस की महामारी ने भी पहले से चरमराई अर्थव्यवस्था की कमर पूरी तरह से तोड़ रखी है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि देश के 24% शिक्षित लोग बेरोजगार हैं। लोगों को नौकरी नहीं मिलती तो वे और पढ़ाई करने लगते हैं। यहां तक कि एम फिल जैसी डिग्री हासिल करने वाले भी कोर्ट में चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन देने को मजबूर हैं।

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