नए भूमि कानून पर घमासान : पीडीपी कार्यकर्ता हिरासत में, केंद्र पर भड़कीं महबूबा

– महबूबा ने कहा – ‘चीन से थरथराते हैं पर जम्मू-कश्मीर में लूटने का कानून’ 

श्रीनगर: केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में जमीन की खरीद-​बिक्री को लेकर बनाए गए नए नियमों से संबंधित अधिसूचना पर सियासी घमासान तूल पकड़ता हुआ नजर आ रहा है। इस नए नियम के मुताबिक, खेती की जमीन के अलावा, अब कोई भी भारतीय नागरिक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जमीन खरीद सकता है। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद से ही पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी विरोध प्रदर्शन पर उतर आई है। नए कानून के खिलाफ में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के कार्यकर्ताओं ने आज गुरुवार को प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।

महबूबा मुफ्ती हुईं आगबबूला

पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में श्रीनगर स्थित पार्टी के मुख्यालय के सामने पहुंचे। यहां से एक रैली निकालने की तैयारी थी। इसी दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पीडीपी कार्यकर्ताओं के हिरासत में लिए जाने को लेकर महबूबा मुफ्ती का गुस्सा कुछ अधिक फूटा पड़ा। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर इतनी ही ताकत है तो चीन को निकालो, जिसने लद्दाख की जमीन खाई है। मुफ्ती भड़क कर बोलीं, ‘पीडीपी कार्यकर्ता शांतिपूर्वक भाजपा सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर की जमीन को लूटने के लिए पारित भूमि कानून के खिलाफ विरोध कर रहे थे। हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और मुझे उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। न तो सिविल सोसायटी और न ही राजनेता यहां बात कर सकते हैं, पूरे जम्मू-कश्मीर को जेल में बदल दिया गया है।’

उन्होंने कहा, ‘ये लोग जम्मू और कश्मीर के संसाधन को लूट लेना जाना चाहते हैं। बीजेपी ने गरीब को दो वक्त की रोटी नहीं दी, वो जम्मू और कश्मीर में ज़मीन क्या खरीदेगा? दिल्ली से रोज एक फरमान जारी होता है, अगर आपके पास इतनी ताकत है तो चीन को निकालो जिसने लद्दाख की जमीन खाई है, चीन का नाम लेने से थरथराते हैं।’

दरअसल, पीडीपी कार्यकर्ता श्रीनगर में नए भूमि कानून और 6 एनजीओ और ट्रस्ट पर एनआईए की रेड के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों को हटने को कहा, जब वे नहीं मानें तो पुलिस ने दर्जनों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया

इस अधिसूचना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नेशल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर अब बिक्री के लिए उपलब्ध है। उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, ‘जम्मू-कश्मीर के भू स्वामित्व कानून में अस्वीकार्य संशोधन किया गया है। डोमिसाइल के प्रतीकवाद को भी हटा दिया गया है और गैर कृषि योग्य जमीन की खरीद और कृषि जमीन के ट्रांसफर को आसान कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर अब बिक्री के लिए तैयार है और गरीब, कम जमीन के मालिकों को इसका नुकसान होगा।’

क्या है पूरा मामला

बता दें कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जमीन खरीदने के लिए ‘राज्य का स्थायी निवासी होने’ की शर्त को हटा दिया है। गृह मंत्रालय का अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। ​​केंद्र सरकार ने कहा है कि यह आदेश केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकलन) तीसरा आदेश, 2020 कहा जाएगा। आदेश में कहा गया है कि सामान्य आदेश अधिनियम, 1897 इस आदेश की व्याख्या के लिए लागू होता है क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र में लागू कानूनों की व्याख्या करता है।

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