यूएन से मोदी का सवाल : आखिर कब तक इंतजार करे भारत?

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री का भाषण

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र में सुधार की भारत की मांग को पुरजोर तरीके से उठाते हुए सवाल किया कि आखिरकार विश्व के सबसे बड़े इस लोकतंत्र को इस वैश्विक संस्था की निर्णय प्रक्रिया से कब तक अलग रखा जायेगा।

राष्ट्र संघ में बदलाव समय की मांग, इंतजार कब तक

संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस संस्था पर जो अटूट विश्वास है भारत का वो बहुत कम देशों में मिलेगा लेकिन यह भी सच्चाई है कि भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र के सुधार को लेकर चल रही प्रक्रिया के पूरा होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। आज भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या यह प्रक्रिया कभी एक तर्कसंगत हल तक पहुंच पायेगी। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। एक ऐसा देश, जहां विश्व की 18 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या रहती है, जहां सैकड़ों भाषाएं हैं, अनेकों पंथ हैं, अनेकों विचारधारा हैं। जिस देश में हो रहे परिवर्तनों का प्रभाव दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर पड़ता है। उस देश को आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने करीब 22 मिनट के अपने इस भाषण कहा कि संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था, प्रक्रिया में बदलाव आज समय की मांग है।

‘सभी बदल जायें और हम ना बदलें नहीं चलेगा’

मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के 130 करोड़ लोगों की भावनाएं प्रकट हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र का जिस स्वरुप में गठन हुआ वह उस समय के हिसाब से ही था जबकि आज दुनिया एक अलग दौर में है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में हमारे वर्तमान की, हमारे भविष्य की आवश्यकताएं और चुनौतियां कुछ और हैं। इसलिए पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी बदल जायें और ‘हम ना बदलें’ तो बदलाव लाने की ताकत भी कमजोर हो जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन किया जाये तो अनेक उपलब्धियां दिखाई देती हैं लेकिन इसके साथ ही अनेक ऐसे उदाहरण हैं जो संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता खड़ी करते हैं।

भारत के 150 देशों को दवाइयां भेजीं

वैश्विक महामारी कोरोना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया 8-9 महीने से संघर्ष कर रही है। इस महामारी से निबटने के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रभावशाली नेतृत्व कहां है। महामारी के मुश्किल समय में भी भारत के औषधि उद्योग ने 150 देशों को दवाइयां भेजी हैं। मोदी ने वैश्विक समुदाय को आश्वस्त कि कि भारत की टीका उत्पादन और अदायगी की क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के काम आयेगी। हम भारत में और अपने पड़ोस में तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल पर बढ़ रहे हैं। टीके की अदायगी के लिए कोल्ड चेन और स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने में भारत सभी की मदद करेगा।

सुरक्षा परिषद में अपनी जिम्मेदारी निभायेगा भारत

अगले साल जनवरी से भारत सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभायेगा। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने की प्रतिष्ठा और इसके अनुभव को हम विश्व हित के लिए इस्तेमाल करेंगे। हमारा मार्ग जनकल्याण से जगकल्याण का है। भारत की आवाज हमेशा शांति सुरक्षा और समृद्धि के लिए उठेगी। भारत की आवाज मानवता, मानवजाति और आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ रही है। एजेंसियां

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