किन मरीजों में होता है ब्लैक फंगस का खतरा, एम्स डायरेक्टर ने बताया

नई दिल्लीः देश में कोरोना वायरस के साथ-साथ अब ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) के केस भी बढ़ने लगे हैं। कई राज्यों में ऐसे मरीज मिले हैं जिनमें यह फंगल इंफेक्शन पाया गया है। ब्लैक फंगस केस के बढ़ने के पीछे कोरोना वायरस तो है ही साथ में स्टेरॉयड को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। शनिवार को एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि डायबिटीज, कोरोना पॉजिटिव और स्टेरॉयड लेने वाले रोगियों में फंगल इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में हमें हमें स्टेरॉयड का दुरुपयोग रोकना चाहिए।

गुलेरिया ने कहा कि यह रोग में चेहरे, नाक, आंख या फिर मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। फेफड़ों में भी फैल सकता है और आंखों की रोशनी भी जा सकता है। गुलेरिया ने कहा कि इस इंफेक्शन को रोकने के लिए हमें प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। यह देखा गया है कि यह एक सेकेंडरी इंफेक्शन हैं फंगल और बैक्टेरियल है जो मौत का कारण बन रहे हैं।

वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि देश में कोविड-19 के कुल मामलों में से 85 प्रतिशत मामले 10 राज्यों से हैं। मंत्रालय ने कहा कि 11 राज्यों में संक्रमण के एक-एक लाख से अधिक उपचाराधीन मामले हैं, जबकि आठ राज्यों में 50 हजार से एक लाख के बीच उपचाराधीन रोगी हैं। इसने बताया कि 24 राज्यों में संक्रमण दर 15 प्रतिशत से अधिक है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

वेट कंट्रोल के साथ आपके मन को शांत रखती हैं ये पांच छोटी-छोटी बातें

कोलकाताः मन अशांत रहने का असर हमारे खाने-पीने की आदतों पर भी पड़ता है। मौजूदा समय में जिस तरह दुनिया अस्त-व्यस्तता से गुजर रही है, उसकी आगे पढ़ें »

बच्चों व महिलाओं के लिए 10 हजार बेड तैयार कर रहा स्वास्थ्य विभाग

बच्चों के लिए स्पेशल कोविड बेड हर अस्पताल में थर्ड वेव के मद्देनजर तैयारियां जोरों पर सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : कोरोना वायरस महामारी के सेकंड वेव ने स्वास्थ्य आगे पढ़ें »

ऊपर